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नौ लोकों के देवतावां37एपिसोड

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नौ लोकों के देवता

नायक कभी सूर्य देश का युद्ध देवता था। फिर एक दिन वह गिर गया – अंधा, बेकार, सबकी नज़र में अपमानित। वह कैदी भी रहा। पर जब उसकी आत्मा शरीर से अलग हुई, तो उसे दैवीय संयोग मिला – एक नई दुनिया दिखी। उसके पास जज़्बा है, सपने हैं। वह मरकर भी अपने देश और परिवार की रक्षा करेगा।
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इस एपिसोड की समीक्षा

रानी का दर्द

काले और सुनहरे वस्त्रों में सजी रानी की आंखों में दर्द साफ दिख रहा था। जब उसने विद्वान की बांह पकड़ी, तो लगा जैसे वह कुछ छुपाने की कोशिश कर रही हो। नौ लोकों के देवता में ऐसे भावनात्मक पल देखना दुर्लभ है। पृष्ठभूमि में जलते दीये और सुनहरी दीवारें इस तनाव को और बढ़ा रही थीं। हर संवाद के बिना भी कहानी आगे बढ़ती है। यह दृश्य दर्शकों को बांधे रखता है। रानी के गहने और मुकुट बहुत भव्य लग रहे थे। विद्वान का चेहरा चिंतित था। क्या वह रानी की मदद कर पाएगा? यह जानने के लिए मैं अगला एपिसोड देखने के लिए बेताब हूं। ऐसे नाटक ही असली कला हैं।

योद्धा का तेज

लाल और काले वस्त्र पहने योद्धा का रवैया बहुत दृढ़ लग रहा था। वह विद्वान के साथ चल रही थी जैसे उसकी रक्षा कर रही हो। महल के बाहर का दृश्य बहुत विशाल और सुंदर था। नौ लोकों के देवता की सिनेमेटोग्राफी वास्तव में कमाल की है। जब घोड़े पर बैठे व्यक्ति ने धनुष उठाया, तो तनाव बढ़ गया। लोग डर के भाग रहे थे। यह दिखाता है कि खतरा कितना गंभीर है। योद्धा की कमर पर तलवार भी ध्यान खींचती है। उसकी आंखों में डर नहीं बल्कि गुस्सा था। यह शो हर मोड़ पर नया ट्विस्ट देता है। मुझे यह शैली बहुत पसंद आ रही है।

असहाय युवतियां

जमीन पर घुटनों के बल बैठी दोनों युवतियां बहुत असहाय लग रही थीं। एक ने दूसरे को बचाने की कोशिश की। धनुषधारी की हंसी बहुत डरावनी थी। उसकी नीयत साफ खराब लग रही थी। नौ लोकों के देवता में खलनायक का किरदार बहुत मजबूत लिखा गया है। तीर चलने वाला है या नहीं, यह तनाव बना हुआ है। उनके कपड़े हल्के नीले और गुलाबी रंग के थे। बालों में सजे फूल भी अब मुरझाए लग रहे थे। यह दृश्य दर्शकों के दिल पर चोट करता है। क्या कोई उन्हें बचाने आएगा? विद्वान या योद्धा कहां हैं? यह सवाल मन में उठता है। कहानी की रफ्तार बहुत तेज है।

चुप्पी का शोर

सुनहरे मुकुट और भारी गहनों के बीच रानी का चेहरा बहुत उदास था। उसने विद्वान से कुछ कहा जो उसने नहीं सुना। नौ लोकों के देवता में ऐसे चुप्पी के पल शोर से ज्यादा असरदार हैं। कमरे में मोमबत्तियों की रोशनी ने एक अलग माहौल बनाया था। विद्वान की पोशाक सादी थी पर उसका तेज प्रभावशाली था। लगता है उनके बीच कोई पुराना वादा था। रानी ने उसकी आस्तीन पकड़कर विनती की होगी। यह रिश्ता बहुत जटिल लग रहा है। क्या वह उसे छोड़ जाएगी या साथ रहेगी? यह देखना दिलचस्प होगा। कपड़ों की बनावट बहुत बारीक थी। हर कढ़ाई में मेहनत दिखती है।

खलनायक की हंसी

घोड़े पर सवार व्यक्ति की हंसी से लगता है कि उसे दूसरों के दर्द में मजा आता है। उसने धनुष पर तीर चढ़ाया और निशाना साधा। नौ लोकों के देवता में एक्शन दृश्य की शुरुआत हो गई है। पीछे खड़े सैनिक भी उसके इशारे का इंतजार कर रहे थे। भागते हुए लोगों के पैर और धूल उड़ती दिखाई दी। यह भगदड़ का दृश्य बहुत वास्तविक लगा। खलनायक के कपड़े लाल और हरे रंग के थे। उसकी आंखों में क्रूरता साफ झलक रही थी। ऐसे खलनायक से नफरत होना लाजिमी है। नायक को जल्दी आना चाहिए। समय बहुत कम बचा है। तीर हवा में उड़ रहा है।

दोस्ती की मिसाल

दो युवतियां एक दूसरे का हाथ थामे डर से कांप रही थीं। उनकी आंखों में आंसू थे। नौ लोकों के देवता में दर्द को बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है। एक युवती ने दूसरे को अपने पीछे छुपा लिया। यह दोस्ती या बहन का प्यार हो सकता है। पत्थर की जमीन सख्त और ठंडी लग रही थी। उनकी चूड़ियां और कंगन टनटना रहे थे। धनुषधारी की नजर सीधी उन पर थी। माहौल में सन्नाटा छा गया था। बस तीर छूटने की देर थी। दर्शक भी सांस रोके देख रहे हैं। क्या कोई चमत्कार होगा? यह उम्मीद बनी हुई है।

नई साझेदारी

विद्वान और योद्धा का साथ चलना एक नई साझेदारी दिखाता है। दोनों के कदम तेज थे। नौ लोकों के देवता में पात्रों के बीच का बंधन मजबूत है। महल की दीवारें ऊंची और लाल रंग की थीं। बाहर का आसमान साफ था। योद्धा के कंधे पर चमड़े का पट्टा था। उसकी कमर पर चाबियां लटक रही थीं। विद्वान का चेहरा गंभीर था। शायद वे किसी मुसीबत की ओर जा रहे हैं। रास्ते में लगे झंडे हवा में लहरा रहे थे। यह दृश्य शांति से पहले का तूफान लग रहा था। आगे क्या होगा यह जानने की उत्सुकता है।

भव्य श्रृंगार

रानी के माथे पर लाल बिंदी और आंखों का काजल बहुत गहरा था। उसने विद्वान की ओर देखा जैसे आखिरी बार देख रही हो। नौ लोकों के देवता में श्रृंगार और सजावट बहुत बेहतरीन है। उसके गले में मोतियों की माला थी। कानों में लंबे झूमके हिल रहे थे। विद्वान ने कुछ कहने की कोशिश की पर रुक गया। शायद शब्द कम पड़ गए थे। कमरे की सजावट राजसी थी। पीछे सुनहरी नक्काशी थी। यह महल किसी राज्य का लग रहा था। रानी का दर्द हर किसी को महसूस हुआ। यह दृश्य यादगार बन गया है।

भगदड़ का मंजर

भागते हुए लोगों की भीड़ में अफरातफरी थी। कोई गिर रहा था तो कोई उठ रहा था। नौ लोकों के देवता में भीड़ दृश्य भी बहुत अच्छे से फिल्माए गए हैं। धूल और शोर से माहौल गंभीर हो गया। घोड़े की टापें जमीन पर गूंज रही थीं। खलनायक को रोकने वाला कोई नहीं था। सब अपनी जान बचाने में लगे थे। यह युद्ध का माहौल था। कपड़ों के रंग धूल में सने हुए थे। यह दृश्य दिखाता है कि शक्ति का दुरुपयोग कितना भयानक हो सकता है। नायक को जल्दी कार्रवाई करनी होगी।

अधूरा सस्पेंस

अंत में तीर चलता है या नहीं, यह सवाल बना रहता है। दोनों युवतियां आंखें बंद किए प्रार्थना कर रही थीं। नौ लोकों के देवता का अंत बहुत असरदार था। धनुषधारी की उंगली डोरी पर थी। हवा में तनाव था। विद्वान शायद रास्ते में ही होगा। योद्धा अपनी तलवार निकाल सकती है। रानी महल में क्या कर रही होगी? सभी पात्रों की कहानी जुड़ रही है। यह शो देखने में बहुत रोमांचक है। मैं अगले भाग का इंतजार नहीं कर सकता। यह कहानी दिल को छू गई है।