वह आदमी जो सूट पहने बच्चे के पास बैठा था, उसकी मुस्कान में कितनी गहराई थी! क्या वह सच में बच्चे का पिता है या फिर कोई और रिश्ता? पहचान की चोरी के इस मोड़ पर हर दर्शक हैरान रह गया। उसने बच्चे के बालों को सहलाया तो लगा जैसे वह उसे अपना बनाना चाहता हो। लेकिन असली सवाल यह है कि वह महिला कौन है जो सब देख रही है?
छोटी सी बच्ची जो नीले जैकेट में थी, उसकी आँखों में एक अजीब सी उदासी थी। वह समझ नहीं पा रही थी कि उसके आसपास क्या हो रहा है। पहचान की चोरी की कहानी में यह बच्चा सबसे बड़ा सवाल बन गया। क्या वह जानती है कि उसकी असली माँ उसे देख रही है? उसकी मासूमियत इस ड्रामे को और भी दर्दनाक बना देती है।
वह महिला जो दीवार के पीछे छिपी थी, उसकी हर सांस में दर्द था। उसने अपना मुँह ढक लिया जब उसने देखा कि उसका बच्चा किसी और के साथ है। पहचान की चोरी का यह दृश्य इतना भावुक था कि आँखें नम हो गईं। वह भाग गई, लेकिन उसकी आँखों में जो आंसू थे, वे कभी नहीं सूखेंगे। यह कहानी हर माँ के दिल को छू लेती है।
वह आदमी जो नीले सूट और चश्मे में था, उसकी हर हरकत में एक रहस्य था। वह बच्चे से बात कर रहा था, लेकिन उसकी आँखों में कुछ और ही था। पहचान की चोरी के इस मोड़ पर लगता है कि वह बच्चे को ले जाने की योजना बना रहा है। लेकिन क्या वह जानता है कि उसकी माँ उसे देख रही है? यह तनाव दर्शकों को बांधे रखता है।
लाल कुर्सियां जो बाहर रखी थीं, वे सिर्फ सजावट नहीं थीं। वे इस कहानी के तनाव का प्रतीक थीं। जब वह महिला भागी और वह आदमी बच्चे को लेकर बाहर आया, तो लाल कुर्सियां उनके बीच की दूरी को दर्शा रही थीं। पहचान की चोरी के इस दृश्य में हर चीज़ का एक मतलब था। यह ड्रामा सिर्फ कहानी नहीं, बल्कि एक कलाकृति है।