वीडियो के अंत में जब वह व्यक्ति अस्पताल के बिस्तर पर आंखें खोलता है और मुस्कुराता है, तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं। क्या वह सच में ठीक हो गया या यह सब एक नाटक था? पहचान की चोरी जैसे शो में ऐसे ट्विस्ट्स ही जान होते हैं। नेटशॉर्ट पर यह सीरीज देखकर मैं हैरान रह गया, क्योंकि अंत बिल्कुल अप्रत्याशित था।
लाल रंग के फर्श पर गिरा हुआ वह शख्स और उसके पास पड़ा आइफल टॉवर का मॉडल, यह दृश्य बहुत प्रतीकात्मक लगता है। शायद यह टूटे हुए सपनों का संकेत है। लड़की की आंखों में जो डर और गम है, वह साफ दिखाई देता है। पहचान की चोरी की यह कहानी हमें रिश्तों की नाजुकता का अहसास कराती है।
अस्पताल वाले सीन में डॉक्टर का चेहरा और उसकी चुप्पी बहुत कुछ कह रही है। वह महिला जो काले कोट में है, उसकी चिंता साफ झलक रही है। जब वह मरीज के पास से चली जाती है, तो कमरे में एक अजीब सी खामोशी छा जाती है। पहचान की चोरी के इस एपिसोड ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया कि आखिर सच क्या है।
नेटशॉर्ट ऐप पर मिलने वाली यह कहानी बहुत ही रोमांचक है। हर सीन में एक नया ट्विस्ट और हर किरदार में एक नया रंग है। खासकर वह दृश्य जहां लड़का मुस्कुराता है, वह दिल जीत लेता है। पहचान की चोरी जैसे शो देखकर लगता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी कितनी बेहतरीन कहानियां बन रही हैं।
अस्पताल के बिस्तर पर हाथों में बेड़ियां देखकर हैरानी होती है। क्या वह मरीज है या कोई अपराधी? यह सवाल दिमाग में घूमता रहता है। उसकी आंखें खुलना और फिर मुस्कुराना, यह सब एक बड़ी साजिश की ओर इशारा करता है। पहचान की चोरी की यह कहानी हमें विश्वास और धोखे के बीच की लकीर दिखाती है।