इस दृश्य में हरे कोट वाले का घमंड साफ दिखता है जब वह काला सूटकेस खोलता है। बूढ़े व्यक्ति की आंखों में दर्द और मजबूरी साफ झलक रही थी। जैसे ही टोपी वाला लड़का दौड़कर आया, पूरा माहौल बदल गया। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ में ऐसे मोड़ देखकर रोमांच होता है। नाक से खून बहना एकदम अप्रत्याशित था। एक्टिंग बहुत दमदार लगी।
क्या सच में पैसा सब कुछ खरीद सकता है। इस सीन में हस्ताक्षर करते वक्त बूढ़े व्यक्ति का हाथ कांप रहा था। टोपी वाले ने सही वक्त पर दखल दिया और कागज छीन लिया। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ की कहानी दिल को छू लेती है। झगड़े के बाद जो खामोशी छा गई वो बहुत भारी थी। कलाकारों ने जान डाल दी है।
अंधेरे आंगन में यह सौदा बहुत संदिग्ध लग रहा था। हरे चमड़े का कोट पहने शख्स खुद को ताकतवर समझ रहा था। लेकिन टोपी वाले लड़के ने सबक सिखा दिया। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ में हर किरदार की अहमियत है। काले जैकेट वाले ने बीच बचाव करने की कोशिश की। अंत बहुत हैरान करने वाला था।
जब गुस्सा हद से बढ़ जाए तो नतीजा ऐसा ही होता है। हरे कोट वाले को अपनी गलती का अहसास हुआ जब खून बहने लगा। बूढ़े व्यक्ति ने मुंह छुपा लिया था शर्म से। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ में भावनाओं को बहुत गहराई से दिखाया गया है। यह दृश्य यादगार बन गया है। दर्शक सोचने पर मजबूर हो जाते हैं।
दीवार के पीछे छुपकर देखना एक अच्छा ट्विस्ट था। टोपी वाले लड़के की आंखों में गुस्सा साफ दिख रहा था। उसने दौड़कर कागज फाड़ दिया और हंगामा किया। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ की स्क्रिप्ट बहुत मजबूत है। लड़ाई के दौरान कैमरा एंगल बहुत शानदार थे। दर्शक बंधे रहते हैं।
शुरू में सब शांत लग रहा था फिर अचानक हंगामा हो गया। सूटकेस में भरे नोटों ने लालच पैदा किया था। लेकिन इंसानियत जीत गई और सच सामने आया। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ में नैतिकता की जीत होती है। नाक से खून देखकर सबके होश उड़ गए। एक्शन सीन बहुत असली लगा।
इस पुराने आंगन में कितने राज दफन हैं। हरे कोट वाले की चालाकी काम नहीं आई। टोपी वाले ने डटकर मुकाबला किया और सच बोला। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ का सेट डिजाइन बहुत असली लगता है। बूढ़े व्यक्ति की चीख दिल दहला देने वाली थी। हर पल तनाव बना रहा।
उस कागज पर दस्तखत सब कुछ बदल सकता था। टोपी वाले लड़के ने उसे रोककर बड़ी हिम्मत दिखाई। हरे कोट वाला हैरान रह गया और कुछ बोल नहीं पाया। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ में ऐसे ही जज्बाती पल आते हैं। काले जैकेट वाले की एंट्री ने माहौल और बिगाड़ दिया। बहुत रोमांचक है।
जब नाक से खून गिरा तो सबकी सांसें रुक गईं। हरे कोट वाले के चेहरे का रंग उतर गया और वह घबरा गया। टोपी वाला अभी भी गुस्से में था। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ में हर सीन में जान है। बूढ़े व्यक्ति की हालत देखकर तरस आया। यह कहानी आगे क्या मोड़ लेगी।
रात के वक्त यह हंगामा क्यों हुआ। पैसे की लेनदेन में इंसानियत दब गई थी। टोपी वाले ने आवाज उठाई और गलत को रोका। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ समाज का आईना दिखाता है। अंत में जो खामोशी थी वो सबसे तेज थी। कलाकारों की मेहनत साफ दिखती है।