इस दृश्य में तनाव साफ झलकता है जब वे दोनों पथ पर चल रहे हैं। नायिका की सफेद खाल की शाल बहुत आकर्षक लग रही है। कहानी में क्या मोड़ आएगा यह देखना दिलचस्प होगा। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ नामक इस नाटक में भावनाओं की गहराई है। युवक के चेहरे पर चिंता साफ दिख रही है जो कहानी को आगे बढ़ाती है। माहौल बहुत सुंदर बनाया गया है। प्राकृतिक रोशनी ने दृश्य को और भी खूबसूरत बना दिया है। दर्शक इस जोड़ी के संबंध को जरूर पसंद करेंगे।
दूसरी महिला के आने से कहानी में नया मोड़ आ गया है। उसके हाथ में कुत्ता बहुत प्यारा लग रहा है। लाल कपड़े वाला कुत्ता दृश्य में रंग भर देता है। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ की कहानी धीरे धीरे खुल रही है। सभी पात्रों के कपड़े बहुत सुंदर हैं। आंतरिक दृश्य भी बहुत आलिशान लग रहा है। दर्शक इस नाटक को जरूर पसंद करेंगे। संवाद बहुत ही प्रभावशाली ढंग से लिखे गए हैं। हर किरदार अपनी जगह महत्वपूर्ण लग रहा है।
बाहर का दृश्य बहुत शांत और सुंदर है। पेड़ और पत्थर का रास्ता कहानी की गंभीरता को बढ़ाता है। नायक और नायिका के बीच की दूरी साफ महसूस होती है। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ में ऐसे दृश्य बहुत प्रभावशाली हैं। सूरज की रोशनी का उपयोग बहुत अच्छे से किया गया है। यह दृश्य दर्शकों को बांधे रखता है। पृष्ठभूमि में पेड़ पत्तों का गिरना मौसम का संकेत देता है। यह बारीकी निर्देशक की समझ को दिखाती है।
घर के अंदर का दृश्य बहुत ही आधुनिक है। सोफे पर बैठे लोग कहानी का अगला हिस्सा बता रहे हैं। सभी के चेहरे के भाव बहुत गंभीर हैं। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ में परिवारिक झगड़े दिखाए गए हैं। नायिका की चाल में बहुत नशा है। यह शो नेटशॉर्ट मंच पर बहुत अच्छा लग रहा है। मंच सज्जा बहुत ही शानदार तरीके से की गई है। प्रकाश व्यवस्था भी मनोदशा के अनुसार तैयार की गई है।
युवक की आंखों में एक अजीब सी बेचैनी है। वह कुछ कहना चाहता है पर चुप है। नायिका भी अपने आप में खोई हुई लग रही है। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ की पटकथा बहुत मजबूत है। संवाद बिना बोले ही सब कुछ कह देते हैं। यह कलाकारों की अच्छी अदाकारी है। मुझे यह जोड़ी बहुत पसंद आ रही है। उनके बीच का तनाव वास्तविक लगता है। यह दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देता है।
कुत्ते वाला दृश्य थोड़ा हल्का फुल्का है। बाकी माहौल बहुत गंभीर है। दूसरी महिला के प्रवेश से तनाव बढ़ गया है। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ में हर किरदार की अहमियत है। कपड़ों का चयन बहुत ही लाजवाब है। बैकग्राउंड में घर बहुत बड़ा और सुंदर है। कहानी आगे क्या होगी यह जानने की उत्सुकता है। वस्त्र और कहानी का संगम बहुत अच्छा है। हर कड़ी में नया खुलासा होता है।
रोशनी और छाया का खेल बहुत खूबसूरत है। सुबह का समय कहानी के लिए सही चुना गया है। नायिका का मेकअप बहुत हल्का और प्राकृतिक है। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ में दृश्यों पर ध्यान दिया गया है। पथ पर सूखे पत्ते गिरने का मौसम साफ दिखता है। यह बारीकी बहुत मायने रखती है। दर्शक इसकी तारीफ करेंगे। छायांकन बहुत ही उच्च स्तर का है। रंगों का संतुलन आंखों को सुकून देता है।
अंदर के दृश्य में सभी लोग इंतजार कर रहे हैं। नायक और नायिका के आने से सबकी नजरें उन पर हैं। माहौल में सन्नाटा छा गया है। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ की कहानी में रहस्य है। कौन क्या सोच रहा है यह पता नहीं चल रहा। यह अनिश्चितता दर्शकों को पसंद आएगी। शो की रफ्तार बहुत अच्छी है। चरमोत्कर्ष की ओर बढ़ते हुए कदम साफ दिख रहे हैं।
नायिका की पोशाक बहुत ही शिष्ट है। पीले और हरे रंग का संयोजन सुंदर है। सफेद खाल ने रूप को निखार दिया है। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ में वस्त्र का भी ध्यान रखा गया है। युवक के काले कपड़े उसकी मनोदशा को दर्शाते हैं। यह विपरीत रंग बहुत अच्छे लग रहे हैं। हर फ्रेम एक तस्वीर जैसा है। वेशभूषा डिजाइनर की मेहनत साफ दिखती है।
कुल मिलाकर यह नाटक बहुत प्रभावशाली है। कहानी में उतार चढ़ाव बहुत अच्छे हैं। पात्रों के बीच का रसायन बहुत गहरा है। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ को जरूर देखना चाहिए। नेटशॉर्ट मंच पर ऐसी सामग्री मिलना दुर्लभ है। मैं अगली कड़ी का बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं। यह कहानी दिल को छू लेती है। निर्माण गुणवत्ता बहुत ही उत्कृष्ट श्रेणी की है।