इस दृश्य में तनाव इतना ज्यादा है कि सांस रुक जाती है। भूरे सूट वाला शख्स अपनी ताकत दिखा रहा है जबकि सफेद कमीज वाला बेचारा डर से कांप रहा है। सोफे पर बैठी लड़की की आंखों में बेबसी साफ दिख रही है। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ नामक इस कार्यक्रम में ऐसे मोड़ देखकर दिल दहल जाता है। काश यह सब बस एक नाटक हो और असलियत में कोई ऐसा न झेले। अभिनय बहुत दमदार लगा मुझे।
मनोरंजन कक्ष का माहौल वैसे ही अजीब होता है लेकिन यहां तो हद ही हो गई। फोन में क्या था जो दिखाकर धमकाया जा रहा है। वह शख्स गुस्से में चिल्ला रहा है और सामने वाला चुपचाप सब सह रहा है। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ की कहानी में यह सबसे तनावपूर्ण पल लगता है। रंगीन पोशाक वाली महिला बिल्कुल शांत बैठे हुए भी घबराई हुई लग रही हैं। निर्देशन कमाल का है।
बोतल को बंदूक की तरह पकड़ना कितना खतरनाक संकेत है। लगता है मामला बहुत गंभीर हो चुका है। सफेद कमीज वाले के चेहरे पर चोट के निशान साफ दिखाई दे रहे हैं। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ में ऐसे कार्रवाई दृश्य देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। उम्मीद है वह लड़का हिम्मत नहीं हारेगा और सच सामने लाएगा। खलनायक का किरदार निभाने वाले की ऊर्जा लाजवाब है बिल्कुल।
रोशनी और छाया का खेल इस सीन को और भी डरावना बना रहा है। नीली बत्तियों के बीच यह झगड़ा बहुत गहरा लग रहा है। फोन के पर्दे पर जो तस्वीर थी वह सब कुछ बदल सकती है। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ की पटकथा में यह मोड़ बहुत बड़ा साबित होगा। सोफे पर बैठी खामोशी सबसे ज्यादा शोर मचा रही है। मुझे यह रोमांचक अंदाज बहुत पसंद आ रहा है आज।
गुस्से में इंसान क्या हद तक जा सकता है यह इस क्लिप में साफ है। भूरे कोट वाला शख्स किसी का लिहाज नहीं कर रहा है। सामने खड़ा लड़का रोने वाला हो गया है देखकर। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ जैसे नाटक में भावनात्मक दृश्य बहुत असर डालते हैं। काश कोई बीच में आकर इस झगड़े को रोक पाता। मंच सजावट भी बहुत यथार्थवादी लगा मुझे इस बार।
यह जो इशारा करके बात करने का तरीका है न, बहुत अपमानजनक लग रहा है। उंगली से इशारा करना किसी वार से कम नहीं लग रहा। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ में किरदारों के बीच की दुश्मनी साफ झलक रही है। रंगीन पोशाक वाली लड़की क्यों चुप है यह समझ नहीं आ रहा। शायद वह भी किसी दबाव में है। कड़ी के अंत का इंतजार नहीं हो रहा है मुझसे।
हर पल में इतनी कहानी छिपी है कि बस देखते रहो। टेबल पर पड़ी बोतलें और गिलास सब गवाह बन रहे हैं। सफेद कमीज वाले की आंखों में आंसू साफ दिख रहे हैं। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ की वजह से मैं रात भर जाग सकता हूं। यह रहस्य बना रहे तो मजा आ जाए। खलनायक की हंसी भी डरावनी लग रही है इस सीन में बिल्कुल।
ताकत का संतुलन बहुत दिलचस्प तरीके से दिखाए गए हैं। एक खड़ा है और एक बैठे हुए भी डरा हुआ है। फोन दिखाकर धमकी देना आजकल आम हो गया है। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ में ऐसे सामाजिक मुद्दे भी उठाए गए हैं। मुझे लगता है यह लड़का बाद में पलटवार करेगा। कहानी में जान है बिल्कुल और दम भी बहुत ज्यादा है।
आवाजें बंद करके भी यह दृश्य देखो तो डर लगता है। चेहरे के हावभाव सब कुछ बता रहे हैं। भूरे सूट वाले की अकड़ टूटनी चाहिए जल्दी ही। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ में न्याय जरूर मिलेगा ऐसा मुझे विश्वास है। लड़की की चुप्पी सबसे बड़ा सवाल बन गई है अभी। ऐसे माध्यम पर अच्छी सामग्री मिलना सुखद है सच में।
अंत में वह बोतल उठाकर क्या करने वाला है यह जानना जरूरी है। धमकी इतनी खुलेआम दी जा रही है। सफेद कमीज वाला शख्स अब क्या कदम उठाएगा। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ की रफ्तार बहुत तेज हो गई है अब। मुझे यह कार्रवाई और नाटक का मिश्रण बहुत भा रहा है। अगली कड़ी कब आएगी बस यही सोच रहा हूं मैं।