पार्किंग की ठंडी रोशनी में दो पुरुषों के बीच जो तनाव था, वह बेवफाई का बदला की शुरुआत लग रहा था। लाल जैकेट वाला शख्स गुस्से में था, जबकि सफेद सूट वाला शांत लेकिन आत्मविश्वास से भरा था। यह झड़प सिर्फ शब्दों की नहीं, बल्कि इरादों की थी। पीछे खड़ी महिला की चुप्पी सब कुछ कह रही थी।
जब वह नीली पोशाक और ताज पहने कार में बैठी, तो लगा जैसे कोई रानी अपने सिंहासन पर हो। लेकिन उसकी आंखों में डर था। सफेद सूट वाले शख्स का व्यवहार धीरे-धीरे बदला, गुस्से से प्यार तक। बेवफाई का बदला में ऐसे मोड़ ही तो दर्शकों को बांधे रखते हैं। कार का इंटीरियर लग्जरी था, पर माहौल तनावपूर्ण।
कार के अंदर का वह पल जब दोनों एक-दूसरे के करीब आए, सांसों की गर्माहट महसूस हुई। उसने उसके होंठों को छूकर देखा, फिर धीरे से चुंबन लिया। बेवफाई का बदला में यह दृश्य दिल को छू गया। लगता था जैसे समय थम गया हो। उनकी आंखों में जो भावनाएं थीं, वे शब्दों से कहीं ज्यादा गहरी थीं।
जब सब कुछ रोमांटिक लग रहा था, तभी फोन की घंटी ने सब बदल दिया। उसने फोन उठाया, और उसका चेहरा बदल गया। बेवफाई का बदला में यह ट्विस्ट बहुत तेज था। लगता है कोई नया खतरा आने वाला है। सफेद सूट वाले शख्स की आंखों में चिंता साफ दिख रही थी।
सफेद सूट पहने शख्स का व्यक्तित्व बहुत जटिल लगता है। कभी गुस्सैल, कभी रोमांटिक, कभी चिंतित। बेवफाई का बदला में उसका किरदार सबसे ज्यादा आकर्षक है। उसकी आंखों में छिपी कहानी जानने को मन करता है। क्या वह सच में प्यार करता है, या सब एक नाटक है?