शुरुआत में चार्लोट इतनी मासूम लग रही थी, लेकिन जैसे ही वोटिंग का रिजल्ट सामने आया, उसका असली रूप सामने आ गया। विवियन के साथ उसकी दुश्मनी साफ दिख रही है। ऑफिस का माहौल और वो तनाव भरी नजरें बता रही हैं कि आगे बहुत बड़ा धमाका होने वाला है। बेवफाई का बदला देखकर रोंगटे खड़े हो गए।
अलेक्जेंडर का मैसेज आते ही कहानी में एक नया मोड़ आ गया। वो सिर्फ बॉस नहीं, बल्कि कुछ और भी लग रहे हैं। जब वो ब्लाइंड्स के पीछे खड़े थे और फिर अचानक मुड़े, तो दिल की धड़कन रुक सी गई। उनकी और असिस्टेंट के बीच की केमिस्ट्री बहुत गहरी है। बेवफाई का बदला की ये लेयर बहुत दमदार है।
चीफ डिजाइनर की कुर्सी के लिए ये वोटिंग सिर्फ एक बहाना लग रही है। विवियन का चार्लोट को देखने का तरीका और फिर असिस्टेंट को बुलाना, सब कुछ प्लान्ड लग रहा है। लक्जरी ऑफिस और महंगे कपड़े, लेकिन दिलों में कितनी गंदगी छिपी है। बेवफाई का बदला में ये पावर गेम देखना बहुत इंटरेस्टिंग है।
जब अलेक्जेंडर ने असिस्टेंट को गले लगाया, तो लगा शायद प्यार है, लेकिन उनकी आंखों में वो चमक कुछ और ही कहानी कह रही थी। क्या वो असिस्टेंट का इस्तेमाल कर रहे हैं चार्लोट से बदला लेने के लिए? ये सवाल दिमाग में घूम रहा है। बेवफाई का बदला का हर सीन एक नया सवाल खड़ा कर देता है।
विवियन सिर्फ एक मैनेजर नहीं, बल्कि पूरी कहानी की चाबी लग रही हैं। वो चार्लोट को नीचा दिखाना चाहती हैं और असिस्टेंट को अपने पक्ष में करना चाहती हैं। उनका हर डायलॉग और हर एक्शन बहुत कैलकुलेटेड है। बेवफाई का बदला में उनका किरदार सबसे ज्यादा कॉम्प्लेक्स लग रहा है।