PreviousLater
Close

लौटकर आया, तो बन गया अपराजेयवां10एपिसोड

2.0K2.0K

लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय

जिसे परिवार ने ठुकरा दिया था, वही नायक असल में एक अनमोल दिव्य शरीर वाला था। अठारह साल तक उसकी प्रतिभा छुपी रही, और उसने हर अपमान सहा। बस उसकी बचपन की साथी ने उसका साथ नहीं छोड़ा। दस साल के वादे के दिन, उसने एक अखाड़ा खड़ा किया, और उसी की प्रतीक्षा कर रही थी। नायक जब लौटा, तो देखा – उसकी प्रेमिका को जबरन शादी के लिए मजबूर किया जा रहा था, और उसका पुराना दुश्मन उसे सबके सामने अपमानित कर रहा था। यहीं से शुरू हुई उसकी असली पहचान और सबसे ऊपर उठने की कहानी।
  • Instagram
इस एपिसोड की समीक्षा

विलेन की हरकतें हद से पार

विलेन की हंसी देखकर गुस्सा आ रहा है। बेचारी महिला को गला दबाया गया। यह दृश्य बहुत दर्दनाक है। लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय में ऐसा लगता है कि नायक अब फटने वाला है। उसकी आंखों में बेबसी और गुस्सा साफ दिख रहा था। काश वह अभी ही हमला कर देता। दर्शक के रूप में मैं बस यही चाहता हूं।

सफेद पोशाक का दर्द

सफेद पोशाक वाली महिला की आंखों में आंसू देखकर दिल टूट गया। वील के नीचे खून का निशान बहुत गहरा असर छोड़ता है। बचपन का फ्लैशबैक बताता है कि उनका रिश्ता कितना पुराना है। लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय की कहानी में यह मोड़ बहुत जरूरी था। अब बदला लेने का समय आ गया है। मुझे उम्मीद है कि नायक जीतेगा।

कवच वाले की मजबूरी

काले कवच वाला व्यक्ति भी असमंजस में फंसा हुआ है। वह कुछ करना चाहता है लेकिन मजबूर लग रहा है। बारिश का माहौल इस दुख को और बढ़ा रहा है। लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय में हर किरदार का दर्द साफ झलकता है। ऐसे सीन देखकर ही तो हम जुड़ पाते हैं। एक्टिंग बहुत ही लाजवाब लगी।

नायक की चुप्पी

नीले वस्त्रों वाले नायक की प्रतिक्रिया सबसे बेहतरीन थी। वह चीखना चाहता था लेकिन आवाज नहीं निकली। विलेन की हरकतें हद से पार हो गई हैं। लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय में अब बड़ा धमाका होने वाला है। मुझे उम्मीद है कि अगले एपिसोड में सब ठीक होगा। यह सीन यादगार बन गया।

घृणित विलेन

सिर पर पट्टी वाला शख्स सच में बहुत घृणित है। उसकी मुस्कान में जहर है। महिला को जमीन पर गिराकर उसे संतोष मिल रहा है। लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय की कहानी में ऐसे विलेन ही असली चुनौती हैं। दर्शक के रूप में मैं बस नायक की जीत चाहता हूं। जल्दी से उसकी क्लास लगनी चाहिए।

बचपन की यादें

बचपन के दृश्य ने पूरी कहानी बदल दी। दो छोटे बच्चे एक दूसरे का हाथ थामे थे। अब वही महिला खून से लथपथ है। लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय में भावनात्मक गहराई बहुत अच्छी है। यह सिर्फ एक्शन नहीं, दिल की जंग भी है। कहानी बहुत दिल को छू लेने वाली है।

माहौल का जादू

माहौल इतना भारी था कि सांस लेना मुश्किल हो रहा था। धुंध और बारिश ने ट्रैजडी को बढ़ाया। हर किरदार की चुप्पी शोर मचा रही थी। लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय में विजुअल्स का इस्तेमाल कमाल का है। मैंने नेटशॉर्ट पर यह देखा तो मजा आ गया। क्वालिटी बहुत ही शानदार लगी।

आंखों की कहानी

महिला की आंखों में डर नहीं, बल्कि एक अजीब सी शांति थी। शायद उसे पता था कि क्या होने वाला है। विलेन को नहीं पता कि वह किससे पंगा ले रहा है। लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय में हर पल सस्पेंस से भरा है। मैं अगला पार्ट देखने के लिए बेताब हूं। कृपया जल्दी अपडेट करें।

टूटा हुआ कवच

कवच वाले व्यक्ति का दर्द सबसे अलग था। वह बाहर से सख्त लेकिन अंदर से टूट रहा है। उसकी आंखें नम थीं। लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय में हर सहायक किरदार की अपनी कहानी है। यह ड्रामा सिर्फ हीरो के बारे में नहीं है। सबकी एक्टिंग बहुत ही दमदार लगी।

क्लाइमेक्स की तैयारी

अंत में जब वह जमीन पर गिरी, तो सबकी सांसें रुक गईं। नायक का चेहरा गुस्से से लाल हो गया। अब बारी है बदले की। लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय का अंत का दृश्य बहुत शानदार होने वाला है। ऐसे सीन बार बार देखने को मन करता है। मैं फंस गया हूं इस कहानी में।