शुरुआत में जो शांत रोमांस दिखाया गया, वह सुबह होते ही तनावपूर्ण बहस में बदल गया। बिस्तर पर पास सोने वाले दो लोग अब एक-दूसरे के सामने खड़े होकर चिल्ला रहे हैं। प्यार और बिछड़ने की यह कहानी सच में दिल को छू लेती है। कमरे का माहौल और पात्रों के चेहरे के भाव बता रहे हैं कि रिश्ते में दरारें आ चुकी हैं। यह दृश्य बहुत ही यथार्थवादी लगता है।
विलासिता से भरे कमरे में बैठे ये पात्र अपनी शक्तिशाली छवि बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनकी आवाज में गुस्सा साफ झलक रहा है। ग्रे सूट वाला व्यक्ति जिस तरह से गुस्से में इशारे कर रहा है, वह बताता है कि मामला गंभीर है। प्यार और बिछड़ने के इस मोड़ पर कहानी बहुत तेज रफ्तार पकड़ती है। दीवार पर लगी पेंटिंग और महंगे फर्नीचर के बीच यह झगड़ा और भी उभर कर आता है।
नीली वेस्ट वाले पात्र की चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचा रही है। वह सोफे पर लेटा हुआ है और सामने खड़े व्यक्ति की बात सुन रहा है, लेकिन उसकी आंखों में एक अलग ही कहानी है। प्यार और बिछड़ने में ऐसे किरदार ही कहानी को आगे बढ़ाते हैं। जब तीसरा व्यक्ति दस्तावेज़ लेकर आता है, तो माहौल और भी गंभीर हो जाता है। यह दृश्य कारोबार और निजी जीवन के टकराव को बहुत अच्छे से दिखाता है।
रात की कोमल रोशनी से लेकर दिन की तेज रोशनी तक का यह सफर बहुत ही दिलचस्प है। पहले दृश्य में जो अपनापन था, वह अब औपचारिकता और गुस्से में बदल गया है। प्यार और बिछड़ने की यह कहानी हमें रिश्तों की नाजुकता का अहसास कराती है। पात्रों के कपड़ों का बदलना भी उनके मूड और स्थिति को दर्शाता है। यह लघु फिल्म अपने छोटे से समय में बहुत कुछ कह जाती है।
जब वह व्यक्ति खड़ा होकर चिल्लाता है, तो उसका गुस्सा साफ दिखाई देता है। उसके हाथ के इशारे और चेहरे के भाव बता रहे हैं कि वह कितना निराश है। प्यार और बिछड़ने में ऐसे दृश्य दर्शकों को बांधे रखते हैं। सामने बैठा व्यक्ति शांत है, लेकिन उसकी आंखों में भी तूफान है। यह मनोवैज्ञानिक खेल बहुत ही रोचक है और दर्शक को सोचने पर मजबूर कर देता है।