गाड़ी के अंदर का सन्नाटा सबसे ज्यादा डरावना था। जब वो महिला होश में आई और देखा कि ड्राइवर बेहोश है, तो उसकी आँखों में जो घबराहट थी, वो दिल दहला देने वाली थी। बच्चे का स्मार्टवॉच देखना और फिर माँ का उसे गले लगाना, ये सब इतना असली लगा कि मैं भी सांस रोके देखता रहा। वही है वो, बॉस! जैसे ही एम्बुलेंस का सायरन बजा, लगा जैसे कहानी का असली मोड़ आ गया हो।
हॉस्पिटल के कॉरिडोर में बैठी उस महिला की बेचैनी हर किसी को महसूस हुई होगी। डॉक्टर का आना और बच्चे को लेकर जाना, फिर वो गरी की गाड़ी जिस पर सफेद चादर थी... उफ्फ! मेरा दिल तो वहीं रुक गया था। जब उसने चादर हटाई और देखा कि वो उसका पति नहीं है, तो राहत और हैरानी का जो मिश्रण था, वो कमाल का था। वही है वो, बॉस! नेटशॉर्ट पर ऐसे सीन देखना सुकून देता है।
इस पूरे हादसे में सबसे ज्यादा प्रभावशाली वो नन्हा बच्चा था। अपनी चोट के बावजूद वो रोया नहीं, बल्कि अपनी माँ को संभालता रहा। जब डॉक्टर उसके पास आए, तो उसने बिना किसी डर के उनका हाथ थाम लिया। बच्चों की ये सहजता और समझदारी बड़ों को भी शर्मिंदा कर देती है। वही है वो, बॉस! उसकी आँखों में डर था, पर हिम्मत भी थी जो किसी बड़े में भी नहीं होती।
जब नर्स वो गरी लेकर आई और महिला ने सोचा कि उसके पति की मौत हो गई, तो उसका रोना किसी का भी दिल तोड़ सकता था। वो चीखें, वो आंसू, सब कुछ इतना तीव्र था कि स्क्रीन के पार से भी दर्द महसूस हो रहा था। और फिर अचानक पति का जिंदा आकर खड़ा हो जाना... ये ट्विस्ट उम्मीद से ज्यादा बेहतरीन था। वही है वो, बॉस! ऐसे मोड़ ही कहानी को यादगार बनाते हैं।
हादसे के बाद जब वो दोनों अस्पताल में मिले, तो शब्दों की जरूरत ही नहीं थी। उनकी आँखों में जो राहत और प्यार था, वो हजारों डायलॉग से भारी था। पति के माथे पर पट्टी और पत्नी के चेहरे पर चोट के निशान, ये सब उस संघर्ष की गवाही दे रहे थे जो उन्होंने साथ झेला। वही है वो, बॉस! नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे इमोशनल सीन्स देखना एक अलग ही अनुभव है।