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वही है वो, बॉस!

छह साल पहले, एक रात ने दीना की ज़िंदगी बदल दी — वह एक अकेली माँ बन गई। उसे कभी पता नहीं चला कि उस रात का वह आदमी एलेक्स था, जो एक्लाट ग्रुप का सीईओ है, और वह तब से उसे ढूंढ रहा है। उसकी साजिशी सौतेली बहन उसकी जगह ले लेती है, दीना की पहचान चुरा लेती है। किस्मत दीना को एक्लाट ग्रुप में एलेक्स की सेक्रेटरी बनाकर ले आती है, जहाँ प्यार फिर से खिल उठता है...
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इस एपिसोड की समीक्षा

पैसे का खेल और बच्चे की जान

शुरुआत में ही एक महिला को अपने बैंक बैलेंस में गड़बड़ी दिखती है, और फिर सीन बदलकर एक खौफनाक किडनैपिंग का मंजर सामने आता है। एक बच्चा कुर्सी से बंधा हुआ है और दो लोग आपस में झगड़ रहे हैं। यह वही है वो, बॉस! जहां पैसों के लिए इंसानियत गिरवी रख दी गई है। तनाव इतना है कि सांस रुक जाए।

ऑफिस की चमक और अपराध की गंदगी

एक तरफ कांच के ऑफिस में बैठे बॉस और दूसरी तरफ एक सुनसान गोदाम में बंधा बच्चा। यह कंट्रास्ट दिल दहला देने वाला है। महिला का रोना और गुस्सा साफ दिखाता है कि वह कितनी बेबस महसूस कर रही है। वही है वो, बॉस! जब अमीर लोग अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल करते हैं, तो नतीजा ऐसा ही होता है।

मां का दर्द और बदमाशों की हंसी

बच्चे की आंखों में डर और मां की आंखों में आंसू। यह दृश्य किसी के भी दिल को चीर देगा। बदमाश लोग हंस रहे हैं, लेकिन उन्हें नहीं पता कि उनकी हंसी कितनी जल्दी रोने में बदल सकती है। वही है वो, बॉस! जहां एक मां अपनी औलाद के लिए कुछ भी कर सकती है। यह कहानी बहुत गहरी है।

फोन कॉल और छुपा हुआ राज

वह महिला फोन पर किससे बात कर रही है? क्या वह पुलिस को बुला रही है या फिर किसी और से मदद मांग रही है? उसके चेहरे पर डर और गुस्सा दोनों साफ दिख रहे हैं। वही है वो, बॉस! जब एक आम इंसान अन्याय के खिलाफ आवाज उठाता है, तो कहानी में नया मोड़ आता है। यह सीन बहुत ही सस्पेंस से भरा है।

गोदाम का डरावना माहौल

अंधेरा गोदाम, टूटी हुई कुर्सियां और एक बंधा हुआ बच्चा। यह सेटिंग ही इतनी डरावनी है कि रोंगटे खड़े हो जाएं। बदमाशों की बातचीत से लगता है कि वे बहुत खतरनाक हैं। वही है वो, बॉस! जहां अपराधियों का कोई डर नहीं है। यह दृश्य दर्शकों को बांधे रखता है और अंत तक देखने पर मजबूर करता है।

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