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वही है वो, बॉस!

छह साल पहले, एक रात ने दीना की ज़िंदगी बदल दी — वह एक अकेली माँ बन गई। उसे कभी पता नहीं चला कि उस रात का वह आदमी एलेक्स था, जो एक्लाट ग्रुप का सीईओ है, और वह तब से उसे ढूंढ रहा है। उसकी साजिशी सौतेली बहन उसकी जगह ले लेती है, दीना की पहचान चुरा लेती है। किस्मत दीना को एक्लाट ग्रुप में एलेक्स की सेक्रेटरी बनाकर ले आती है, जहाँ प्यार फिर से खिल उठता है...
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इस एपिसोड की समीक्षा

हॉस्पिटल में तनाव का माहौल

अस्पताल के गलियारे में खड़ी माँ और बेटे के चेहरे पर चिंता साफ झलक रही है। नर्स के आने के बाद जो बातचीत होती है, उससे लगता है कि कुछ गड़बड़ है। डॉक्टर का फोन पर व्यस्त रहना और महिला का गुस्सा करना सब कुछ और भी जटिल बना देता है। वही है वो, बॉस! जैसे ही लिफ्ट के दरवाजे खुलते हैं, माँ बेटे को लेकर अंदर जाती है, लेकिन नर्स की हैरानी भरी नज़रें कुछ और ही कहानी कह रही हैं।

गुस्से में महिला का हंगामा

सफेद कोट वाले डॉक्टर से बहस करती हुई महिला का गुस्सा सातवें आसमान पर है। उसकी आवाज़ और हाव-भाव से लगता है कि वह किसी बड़ी समस्या से जूझ रही है। पास खड़ा ब्लू सूट वाला शख्स शांत खड़ा है, लेकिन उसकी आँखों में भी चिंता है। वही है वो, बॉस! बिस्तर पर लेटे बच्चे का चेहरा देखकर लगता है कि यह झगड़ा उसी से जुड़ा है। महिला का हर शब्द जैसे किसी आरोप की तरह गूंज रहा है।

नर्स का फोन और हैरानी

नीली वर्दी वाली नर्स जब अपना फोन देखती है, तो उसके चेहरे के भाव बदल जाते हैं। वह कुछ पढ़कर हैरान रह जाती है और फिर माँ की तरफ देखती है। ऐसा लगता है कि फोन पर कोई ऐसी जानकारी आई है जिसने सब कुछ बदल दिया। वही है वो, बॉस! माँ का लिफ्ट में चले जाना और नर्स का वहीं खड़ा रहना एक अजीब सी खामोशी छोड़ जाता है। क्या फोन में कोई राज़ छिपा था?

ब्लू सूट वाले की चुप्पी

गुस्से में महिला के सामने खड़ा ब्लू सूट वाला शख्स कुछ बोल नहीं रहा, बस सुन रहा है। उसकी आँखों में एक अजीब सी बेचैनी है, जैसे वह कुछ कहना चाहता हो लेकिन कह न पा रहा हो। वही है वो, बॉस! डॉक्टर का फोन देखना और महिला का चिल्लाना, सब कुछ एक तनावपूर्ण माहौल बना रहा है। क्या वह इस सब का हिस्सा है या बस एक मूक गवाह?

बच्चे का उदास चेहरा

हॉस्पिटल बेड पर लेटे बच्चे की आँखों में एक अजीब सी खामोशी है। वह न तो रो रहा है, न ही कुछ बोल रहा है। बस छत की तरफ देख रहा है। उसके आसपास चल रहा हंगामा, महिला का गुस्सा, डॉक्टर की व्यस्तता, सब कुछ उसके लिए शायद मायने नहीं रखता। वही है वो, बॉस! उसकी उदासी सब कुछ कह जाती है। क्या वह सब समझ रहा है या बस थक चुका है?

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