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वही है वो, बॉस!

छह साल पहले, एक रात ने दीना की ज़िंदगी बदल दी — वह एक अकेली माँ बन गई। उसे कभी पता नहीं चला कि उस रात का वह आदमी एलेक्स था, जो एक्लाट ग्रुप का सीईओ है, और वह तब से उसे ढूंढ रहा है। उसकी साजिशी सौतेली बहन उसकी जगह ले लेती है, दीना की पहचान चुरा लेती है। किस्मत दीना को एक्लाट ग्रुप में एलेक्स की सेक्रेटरी बनाकर ले आती है, जहाँ प्यार फिर से खिल उठता है...
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इस एपिसोड की समीक्षा

अस्पताल में तूफान

अस्पताल के कमरे में जो तनाव है वो देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। सुनहरे बालों वाला शख्स और वो महिला जोर-जोर से बहस कर रहे हैं, जबकि बिस्तर पर लेटा बच्चा बेचारा सब देख रहा है। वही है वो, बॉस! जैसे ही कोई फोन लेकर आता है, माहौल और भी गंभीर हो जाता है। यह दृश्य दर्शाता है कि कैसे एक छोटी सी गलतफहमी पूरे परिवार को हिला सकती है। अभिनेताओं के चेहरे के भाव वास्तविक लगते हैं।

माँ का दर्द और बेटे की चुप्पी

लक्जरी घर में माँ और बेटे के बीच का संवाद दिल को छू लेता है। बच्चे की आँखों में उदासी और माँ की आँखों में चिंता साफ दिख रही है। वही है वो, बॉस! जब माँ घुटनों पर बैठकर बच्चे से बात करती है, तो लगता है जैसे वह उसे किसी बड़े खतरे से बचाना चाहती हो। बच्चे का चुपचाप चले जाना और माँ का उसे देखते रहना बहुत इमोशनल है। यह सीन पेरेंटिंग की मुश्किलों को खूबसूरती से दिखाता है।

बाहर का खतरा

जैसे ही महिला घर से बाहर निकलती है, माहौल बदल जाता है। एक अजनबी शख्स का आना और उसका गुस्से में बात करना सस्पेंस बढ़ा देता है। वही है वो, बॉस! महिला के चेहरे पर डर और हैरानी साफ झलक रही है। यह सीन बताता है कि कहानी में अब एक नया मोड़ आने वाला है। बाहर का वातावरण और उस शख्स का लुक काफी थ्रेटनिंग है। दर्शक के रूप में हमें अब जानने की उत्सुकता होती है कि आखिर यह शख्स कौन है।

अमीरी और गरीबी का टकराव

वीडियो में दो दुनियाओं का टकराव साफ दिखता है। एक तरफ अस्पताल और लक्जरी घर का माहौल है, तो दूसरी तरफ बाहर खड़ा वह शख्स जिसका लुक बिल्कुल अलग है। वही है वो, बॉस! उसकी लेदर जैकेट और गुस्से वाली बातचीत बताती है कि वह किसी रईस परिवार से नहीं है। यह क्लाश कहानी को और भी दिलचस्प बना देता है। लगता है कि अब कोई बड़ा संघर्ष शुरू होने वाला है जो इन दोनों दुनियाओं को आमने-सामने लाएगा।

बच्चे की मासूमियत

पूरे वीडियो में सबसे ज्यादा असर बच्चे के किरदार का है। चाहे वह अस्पताल के बिस्तर पर हो या घर में माँ के साथ, उसकी मासूमियत दिल जीत लेती है। वही है वो, बॉस! जब माँ उसे समझाती है तो वह बिना कुछ बोले चला जाता है, जो उसकी उदासी को और बढ़ा देता है। बच्चे के अभिनय में जो सहजता है वह बड़े-बड़े कलाकारों में भी नहीं होती। यह किरदार कहानी की रूह बन गया है।

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