हरियाली पोशाक वाली महिला की चीखें सुनकर रोंगटे खड़े हो गए। यह दृश्य पहचान गलत, सज़ा बराबर की याद दिलाता है जहाँ भावनाएं उबल पड़ती हैं। उसकी आंखों में आंसू और चेहरे पर गुस्सा देखकर लगता है कि कोई गहरा धोखा हुआ है। बाकी लोग बस तमाशबीन बने खड़े हैं, जो स्थिति को और भी तनावपूर्ण बना रहा है।
वह आदमी जो काले सूट में खड़ा है, उसकी चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचा रही है। जब हरियाली पोशाक वाली महिला उसके पैरों में गिर रही थी, तब भी वह पत्थर बना रहा। शायद वह पहचान गलत, सज़ा बराबर का वह किरदार है जो सच्चाई छिपा रहा है। उसकी आंखों में कोई पछतावा नहीं, बस एक अजीब सी ठंडक है जो डराती है।
पीली शर्ट पहनी बुजुर्ग महिला का चेहरा देखकर दिल पसीज जाता है। वह सब कुछ देख रही है लेकिन बोल नहीं रही। शायद वह पहचान गलत, सज़ा बराबर की कहानी की वह मां है जिसने सब कुछ सहा है। उसकी आंखों में बेबसी और चेहरे पर थकान साफ झलक रही है। वह जानती है कि सच्चाई क्या है लेकिन मजबूर है।
घुंघराले बालों वाला युवक अचानक बीच में कूद पड़ा। उसका चेहरा हैरानी और गुस्से से भरा हुआ था। लगता है पहचान गलत, सज़ा बराबर में वह वह किरदार है जो अन्याय के खिलाफ आवाज उठा रहा है। उसने हरियाली पोशाक वाली महिला की तरफ इशारा किया, शायद उसे सच्चाई बताने के लिए। उसकी आवाज में दम था।
नीली साड़ी वाली महिला की आंखों से आंसू नहीं रुक रहे थे। वह हरियाली पोशाक वाली महिला को समझाने की कोशिश कर रही थी। शायद वह पहचान गलत, सज़ा बराबर की वह बहन है जो परिवार को टूटने से बचाना चाहती है। उसकी आवाज कांप रही थी और हाथ जोड़कर विनती कर रही थी। दर्द साफ झलक रहा था।
गुलाबी कार्डिगन पहनी युवती बस चुपचाप सब देख रही थी। उसकी आंखों में डर और हैरानी थी। शायद वह पहचान गलत, सज़ा बराबर की वह बेटी है जो मां के दर्द को समझ नहीं पा रही। वह न तो बोल रही थी न ही हिल रही थी। बस एक कोने में खड़ी होकर तूफान को देख रही थी। उसकी चुप्पी सबसे ज्यादा बोल रही थी।
हरियाली पोशाक वाली महिला की चीखें सुनकर लगता है कि कोई बड़ा झूठ पकड़ा गया है। वह बार-बार उस काले सूट वाले आदमी की तरफ इशारा कर रही थी। शायद पहचान गलत, सज़ा बराबर में वह वह किरदार है जिसने सबको धोखा दिया है। उसकी आंखों में पागलपन और चेहरे पर नफरत साफ झलक रही थी। सच्चाई सामने आ गई है।
अस्पताल के कॉरिडोर में यह तमाशा देखकर लगता है कि जीवन कितना नाटकीय हो सकता है। सब लोग एक दूसरे को देख रहे हैं लेकिन कोई कुछ नहीं बोल रहा। शायद पहचान गलत, सज़ा बराबर की यह वह जगह है जहाँ सब कुछ बदल गया। सफेद दीवारें और नीली मंजिल इस तनाव को और भी बढ़ा रही हैं। सब कुछ थम सा गया है।
जब हरियाली पोशाक वाली महिला जमीन पर गिर गई, तो सबकी सांसें थम गईं। उसने उस काले सूट वाले आदमी के पैर पकड़ लिए थे। शायद वह पहचान गलत, सज़ा बराबर की वह प्रेमिका है जिसने सब कुछ खो दिया है। उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे और आवाज में दर्द था। वह माफ़ी मांग रही थी या शायद इंसाफ की भीख मांग रही थी।
यह दृश्य किसी अंत की शुरुआत लग रहा है। सब लोग एक दूसरे के सामने खड़े हैं और सच्चाई सामने आ चुकी है। शायद पहचान गलत, सज़ा बराबर की यह वह घड़ी है जहाँ सब कुछ बदल जाएगा। हरियाली पोशाक वाली महिला की चीखें और बाकी लोगों की चुप्पी इस बात का सबूत है कि अब कुछ भी पहले जैसा नहीं रहेगा। तूफान आ चुका है।