इस दृश्य में नौकरानी का व्यवहार बेहद डरावना है। वह चाकू लेकर घूम रही है और बंधी हुई महिला को डरा रही है। पहचान गलत, सज़ा बराबर में ऐसे दृश्य दर्शकों को झकझोर देते हैं। उसकी आँखों में पागलपन साफ दिख रहा था।
बूढ़ी महिला की आँखों में आँसू और चेहरे पर खौफ देखकर बहुत बुरा लगा। वह रस्सियों में बंधी हुई थी और मदद के लिए तरस रही थी। सज़ा बराबर, पहचान गलत जैसे शो में इमोशनल सीन्स बहुत गहरा असर छोड़ते हैं।
वह लड़का जो सफेद टी शर्ट में था, उसका व्यवहार बहुत अजीब था। वह कभी नौकरानी के साथ था तो कभी बंधी महिला के पास। पहचान गलत, सज़ा बराबर में ऐसे किरदार कहानी को और उलझा देते हैं।
जब नौकरानी ने फोन दिखाया और कर्ज का मैसेज पढ़ा, तो सब कुछ बदल गया। लगा कि यह सब पैसे के लिए हो रहा है। सज़ा बराबर, पहचान गलत में ऐसे ट्विस्ट बहुत अच्छे लगते हैं।
उसकी मुस्कान देखकर लगता था जैसे वह कुछ छिपा रही हो। चाकू हाथ में लिए वह इतनी खुश क्यों थी? पहचान गलत, सज़ा बराबर में ऐसे किरदार हमेशा संदेह पैदा करते हैं।
पूरा दृश्य अंधेरे और नीली रोशनी में था, जो बहुत डरावना लग रहा था। बंधी महिला की चीखें और नौकरानी की हंसी माहौल को और भयानक बना रही थी। सज़ा बराबर, पहचान गलत का सेट डिजाइन बहुत अच्छा है।
जब वह महिला चीखी तो लगा जैसे उसका दिल टूट गया हो। उसकी आवाज़ में दर्द और डर साफ सुनाई दे रहा था। पहचान गलत, सज़ा बराबर में ऐसे सीन्स दर्शकों को रोने पर मजबूर कर देते हैं।
वह नौकरानी कभी हंसती है तो कभी गुस्से में चिल्लाती है। उसका व्यवहार बहुत अनिश्चित है। सज़ा बराबर, पहचान गलत में ऐसे किरदार कहानी को रोचक बनाते हैं।
उस लड़के की आँखों में एक अजीब सी चमक थी, जैसे वह कुछ गलत करने वाला हो। वह बंधी महिला के पास झुककर कुछ कह रहा था। पहचान गलत, सज़ा बराबर में ऐसे पल बहुत तनावपूर्ण होते हैं।
जब सूट पहने आदमी ने प्रवेश किया, तो लगा कि कहानी में नया मोड़ आएगा। नौकरानी की आँखें फैल गईं। सज़ा बराबर, पहचान गलत में ऐसे एंट्री सीन्स बहुत रोमांचक होते हैं।