बर्फ़ील रात में यश सिंह का दर्द साफ़ दिख रहा था। जब उसने बंदूक आदिति शर्मा की तरफ की, तो लगा कि वो उसे मारेगा, पर असल में वो उसे बचा रहा था। आज़ाद परिंदे की ये कहानी दिल को छू लेती है। पुलिस की गाड़ी और कंटेनर का माहौल बहुत तनावपूर्ण था। यश की आँखों में नमी देखकर मैं भी रो पड़ी।
तीन साल पहले का फ्लैशबैक सबसे बेहतरीन था। चर्च के अंदर का सफ़ेद माहौल और यश सिंह का सिगरेट पीना उनके बीच के अंतर को दिखाता है। आदिति शर्मा स्कूल यूनिफॉर्म में बहुत प्यारी लग रही थी। आज़ाद परिंदे में ऐसे पल बार-बार देखने को मिलते हैं। उनका गले मिलना बहुत इमोशनल था।
यश सिंह एक गैंगस्टर होते हुए भी इतना संवेदनशील क्यों है। आदिति शर्मा को पुलिस कार से बाहर निकालते वक्त उसकी घबराहट साफ़ दिखी। आज़ाद परिंदे की स्टोरीलाइन बहुत यूनिक है। बर्फ़ गिरने का सीन बहुत खूबसूरत तरीके से शूट किया गया है। मुझे ये ड्रामा बहुत पसंद आया।
आदिति शर्मा की आँखों में डर था पर हिम्मत भी। जब यश सिंह ने बंदूक नीची की, तो लगा कि प्यार जीत गया। आज़ाद परिंदे में ऐसे ट्विस्ट बार-बार आते हैं। पोर्ट का लोकेशन बहुत डार्क और मिस्ट्रीयस था। दोनों के बीच की केमिस्ट्री लाजवाब है।
चर्च वाले सीन में यश सिंह ने पैसे दिए थे, शायद वो मदद करना चाहता था। आदिति शर्मा ने वो पैसे लेने से मना कर दिया होगा। आज़ाद परिंदे की हर एपिसोड में नया खुलासा होता है। एक्टिंग इतनी नेचुरल है कि लगता है सब असली है। बहुत बढ़िया काम किया है।
बर्फ़ में खड़े होकर दोनों का संवाद बिना बोले ही सब कह गया। यश सिंह के चेहरे पर खरोंच थी, शायद वो किसी लड़ाई से आया था। आज़ाद परिंदे का ये एपिसोड सबसे ज्यादा इंटेंस था। आदिति शर्मा का रोल बहुत चुनौतीपूर्ण रहा होगा। मुझे ये सस्पेंस बहुत पसंद है।
पुलिस की गाड़ी के आते ही यश सिंह का व्यवहार बदल गया। वो आदिति शर्मा को छोड़ना नहीं चाहता था पर मजबूरी थी। आज़ाद परिंदे में ऐसे क्लिफहैंगर बहुत अच्छे लगते हैं। रात का अंधेरा और बर्फ़ का सफ़ेद रंग बहुत कंट्रास्ट बना रहा था। देखते ही बनता है।
तीन साल पहले और अब के यश सिंह में बहुत फर्क आ गया है। पहले वो ज्यादा खुलकर बात करता था, अब चुपचाप दर्द सह रहा है। आदिति शर्मा भी अब बड़ी हो गई है। आज़ाद परिंदे की टाइमलाइन बहुत दिलचस्प तरीके से दिखाई गई है। मुझे फ्लैशबैक वाले पार्ट सबसे ज्यादा पसंद आए।
यश सिंह ने बंदूक आदिति शर्मा के सिर पर रखी पर गोली नहीं चलाई। ये साबित करता है कि वो उसे जान से ज्यादा प्यार करता है। आज़ाद परिंदे में रोमांस और एक्शन का अच्छा मिश्रण है। ये सीरीज देखना बहुत अच्छा अनुभव रहा। सबको देखना चाहिए।
अंत में जब यश सिंह ने आदिति शर्मा को गले लगाया, तो सब ठीक हो गया। चर्च की घंटी और बर्फ़ की आवाज़ बहुत सुकून देने वाली थी। आज़ाद परिंदे की कहानी अधूरी लगती है अगर ये सीन न हों। दोनों की जोड़ी बहुत जचती है। जल्दी अगला एपिसोड आए।