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आज़ाद परिंदेवां23एपिसोड

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आज़ाद परिंदे

अपनी चाची से बचने के लिए आदिति गैंगस्टर यश को फंसाती है। यश उसे अपने पास रोक लेता है। धीरे धीरे दोनों करीब आते हैं, लेकिन यश को अपने गैंग ने धोखा देकर समुद्र में फेंक दिया। आदिति विदेश चली जाती है, जहाँ उसकी मुलाकात याददाश्त खो चुके यश से होती है। वापस लौटने पर पता चलता है कि यश का भूलना एक नाटक था, वह सत्ता हथियाने की साजिश रच रहा था। आदिति भागने की कोशिश करती है, लेकिन यश उसे कैद कर लेता है और उसे पता चलता है कि वह गर्भवती है। क्या आदिति कभी आज़ाद हो पाएगी? क्या यश का प्यार कभी सच्चा था?
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इस एपिसोड की समीक्षा

शीशे में छिपा राज़

शुरू का वो दृश्य जब दोनों शीशे के सामने खड़े थे, नज़रों में कितनी गहराई थी। ऐसा लगा जैसे कुछ कहना चाहते हैं पर शब्द रुक गए। आज़ाद परिंदे की कहानी में ये चुप्पी सबसे शोर मचाती है। काले कोट वाले का गुस्सा और सफेद पोशाक वाली की खामोशी देखकर दिल भर आया। बिल्कुल वैसे ही जैसे कोई पुराना जख्म हरा हो गया हो। मुझे ये पल बहुत भाया।

कोट फेंकने का अंदाज़

जब उसने गुस्से में कोट फेंका, तो लगा जैसे रिश्तों का भरोसा टूट गया हो। ये छोटी सी हरकत बड़ी कहानी कह गई। नायक का गुस्सा जायज़ था या बस नाटक, ये समझना मुश्किल है। पर अभिनय इतना असली लगा कि सांस रुक गई। ऐसे मोड़ ही तो इस धारावाहिक को खास बनाते हैं। आज़ाद परिंदे का ये अंदाज़ बेमिसाल है। हर कोई देखे।

महफिल का माहौल

महफिल का दृश्य बहुत ही तनावपूर्ण था। सबके हाथ में शराब के गिलास थे पर नज़रें किसी और को ढूंढ रही थीं। वहां की रोशनी और चेहरों के भाव बता रहे थे कि कुछ गड़बड़ है। आज़ाद परिंदे में हर मेहफिल के पीछे एक साज़िश छिपी लगती है। मुझे ये रहस्य बहुत पसंद आया। हर पल नया मोड़ मिलता है। सस्पेंस बना रहे।

सफेद कोट वाली नायिका

उस नायिका ने जब सफेद कोट उतारा, तो लगा जैसे उसने अपना बचाव कवच उतार दिया हो। उसकी आंखों में डर और गुस्सा दोनों थे। बिना कुछ बोले ही उसने सब कह दिया। अभिनेत्री ने कमाल का काम किया है। ऐसे किरदार निभाना आसान नहीं होता। आज़ाद परिंदे में भावनाओं की गहराई है। दिल को छू लेता है।

नज़रों की जंग

जब वो दोनों एक दूसरे को देख रहे थे, तो लगा कमरे में हवा भी रुक गई हो। बिना बोले ही सब कुछ तय हो रहा था। ये खामोशी शोर से ज्यादा असरदार थी। आज़ाद परिंदे की इस कड़ी ने दिल जीत लिया। ऐसे दृश्य बार बार देखने को मन करता है। कहानी बहुत रोचक लग रही है। बिल्कुल असली लगता है।

दोस्त या दुश्मन

महफिल में बैठे बाकी लोग भी कुछ कम नहीं थे। उनकी हंसी के पीछे भी कोई मकसद छिपा लग रहा था। मुख्य जोड़े के बीच की दूरी और बाकी लोगों की नज़दीकियां देखकर हैरानी हुई। कहानी में ये उलझन बहुत रोचक है। हर कोई किसी न किसी खेल का हिस्सा लगता है। आज़ाद परिंदे का जादू चल रहा है। सब देख रहे हैं।

गुस्से का पैमाना

उस शख्स का गुस्सा साफ़ झलक रहा था जब उसने कोट उठाया। शायद उसे लगा कि उसका अपमान हुआ है। पर बाद का दृश्य बताता है कि प्यार अभी भी बाकी है। आज़ाद परिंदे में रिश्तों की ये खींचतान बहुत असली लगती है। हर कोई अपनी जगह सही है। दर्शक हैरान हो जाते हैं। क्या होगा आगे।

शराब के गिलास और राज़

टेबल पर रखे शराब के गिलास सिर्फ पीने की चीज़ नहीं थे। वो शायद गवाह थे उन बातों के जो कही नहीं गईं। जब उसने गिलास उठाया तो हाथ कांप रहे थे। ये बारीकियां ही तो इस धारावाहिक को बेहतरीन बनाती हैं। मैं अगली कड़ी का इंतज़ार नहीं कर सकता। आज़ाद परिंदे की धूम मची है। सबकी जुबां पर है।

अलविदा या फिर मिलेंगे

जब वो नायिका वहां से जाने लगी, तो लगा शायद ये आखिरी मुलाकात है। पर उस शख्स की नज़रें उसे रोक रही थीं। क्या वो उसे जाने देंगे या वापस बुलाएंगे। आज़ाद परिंदे का ये सवाल दिमाग में घूम रहा है। कहानी का हर मोड़ नया आश्चर्य देता है। मैं हैरान रह गया। बहुत अच्छा लगा।

ड्रेसिंग रूम का राज़

शुरुआत में ड्रेसिंग रूम का दृश्य बहुत निजी था। फिर अचानक माहौल बदल गया। ये बदलाव बहुत तेज़ी से हुआ। लगता है कोई तीसरा इंसान इस बीच में आ गया है। वैसे भी इस धारावाहिक में हर पल कुछ नया होता रहता है। मुझे ये अनिश्चितता बहुत पसंद है। आज़ाद परिंदे देखने लायक है। जरूर देखें।