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आज़ाद परिंदेवां46एपिसोड

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आज़ाद परिंदे

अपनी चाची से बचने के लिए आदिति गैंगस्टर यश को फंसाती है। यश उसे अपने पास रोक लेता है। धीरे धीरे दोनों करीब आते हैं, लेकिन यश को अपने गैंग ने धोखा देकर समुद्र में फेंक दिया। आदिति विदेश चली जाती है, जहाँ उसकी मुलाकात याददाश्त खो चुके यश से होती है। वापस लौटने पर पता चलता है कि यश का भूलना एक नाटक था, वह सत्ता हथियाने की साजिश रच रहा था। आदिति भागने की कोशिश करती है, लेकिन यश उसे कैद कर लेता है और उसे पता चलता है कि वह गर्भवती है। क्या आदिति कभी आज़ाद हो पाएगी? क्या यश का प्यार कभी सच्चा था?
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इस एपिसोड की समीक्षा

प्यार और पैसों का खेल

शुरू में जो रोमांस दिखाया गया वो दिल को छू लेने वाला था। बिस्तर पर वो पल बहुत खूबसूरत थे। लेकिन फिर अचानक मोड़ आया जब वो ब्रीफकेस खुला। आज़ाद परिंदे में ऐसे ट्विस्ट उम्मीद से ज्यादा हैं। युवक की आंखों में दर्द साफ दिख रहा था जब उसने वो नोट गिने। क्या प्यार जीत पाएगा या पैसा? ये देखना बाकी है।

सुबह की शुरुआत और फिर तनाव

सुबह का वो सीन जहां उसने गिफ्ट दिया था बहुत प्यारा लगा। टाई का डिब्बा खोलते वक्त उनकी मुस्कान देखकर लगा सब ठीक है। पर आज़ाद परिंदे की कहानी इतनी सीधी नहीं है। बाहर निकलते ही असली दुनिया का सामना हुआ। बुजुर्ग आदमी की एंट्री ने सब बदल दिया। अब लगता है मुसीबत खड़ी हो गई है।

विलेन की एंट्री धमाकेदार

चश्मे वाला वो आदमी देखते ही समझ आ गया कि विलेन यही है। उसकी गर्दन में सोने का लॉकेट और पीछे खड़े गुंडे। आज़ाद परिंदे में किरदारों की डिजाइन बहुत गहरी है। उसने जो बातें कीं उनसे साफ लग रहा था कि वो ताकत का इस्तेमाल कर रहा है। युवक के चेहरे पर बेबसी साफ झलक रही थी उस वक्त।

लड़की की चिंता देखकर बुरा लगा

जब वो युवती सोफे पर बैठी थी तो उसकी आंखों में डर था। शायद उसे पता चल गया है कि क्या होने वाला है। आज़ाद परिंदे में इमोशनल लेयरिंग बहुत अच्छी है। उसने कुछ कहा नहीं पर उसकी खामोशी सब बता रही थी। काश वो युवक उस पैसे को ठुकरा देता। अब तो बस यही दुआ है कि सब ठीक हो जाए।

नोटों का ब्रीफकेस और सच्चाई

वो काला ब्रीफकेस जब खुला तो अंदर नोटों के गड्डे थे। ये सीन बहुत क्लासिक है पर यहाँ अलग लगा। आज़ाद परिंदे में दिखाया गया है कि कैसे पैसा रिश्तों में दरार डालता है। युवक ने वो पैसा हाथ में लिया पर उसका दिल कहीं और था। ये टकराव बहुत तेज था और दर्शक को बांधे रखता है।

रोमांस से थ्रिलर तक का सफर

पहले आधे हिस्से में सिर्फ प्यार था, बाद में सब बदल गया। बेडरूम की शांति और लिविंग रूम का शोर। आज़ाद परिंदे की स्क्रिप्ट बहुत स्मार्ट है। एक तरफ गिफ्ट था तो दूसरी तरफ रिश्वत जैसा पैसा। इस विरोधाभास ने कहानी को नया मोड़ दिया। अब देखना है वो क्या फैसला लेता है।

अभिनय में दम है

युवक की आंखों में जो दर्द था वो बिना बोले समझ आ गया। जब वो नोट गिन रहा था तो लगा वो टूट रहा है। आज़ाद परिंदे के एक्टर्स ने कम शब्दों में बड़ी बात कह दी। बुजुर्ग आदमी की हंसी भी बहुत खौफनाक थी। ऐसे सीन बार बार देखने को मन करता है। बहुत गहरा असर छोड़ते हैं ये पल।

कपड़ों का चुनाव भी खास है

युवती की सफेद ड्रेस और युवक का भूरा जैकेट। रंगों का खेल भी कहानी बता रहा है। आज़ाद परिंदे में दृश्य की दृष्टि से भी बहुत ध्यान दिया गया है। जब वो बुजुर्ग आदमी आया तो काले कपड़े और गहने। ये सब मिलकर एक माहौल बनाते हैं। छोटी चीजें भी बड़ी कहानी कहती हैं यहाँ।

अगले एपिसोड का इंतज़ार

यहाँ कहानी ऐसे मोड़ पर रुकी है कि मन नहीं लग रहा। क्या वो पैसा लेगा या प्यार चुनेगा? आज़ाद परिंदे का हर एपिसोड सस्पेंस से भरा है। वो युवती चुपचाप सब देख रही थी। अब तो बस अगला पार्ट देखना है। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे शो मिलना मुश्किल है जो इतना बांधे रखें।

रिश्तों की कीमत

क्या प्यार की कोई कीमत होती है? इस शो ने यही सवाल उठाया है। जब वो ब्रीफकेस टेबल पर रखा गया तो माहौल बदल गया। आज़ाद परिंदे में दिखाया गया है कि ताकतवर लोग कैसे खेलते हैं। युवक की मजबूरी देखकर दिल दुखी हो गया। उम्मीद है वो अपनी लड़ाई लड़ेगा और जीतेगा।