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आज़ाद परिंदेवां61एपिसोड

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आज़ाद परिंदे

अपनी चाची से बचने के लिए आदिति गैंगस्टर यश को फंसाती है। यश उसे अपने पास रोक लेता है। धीरे धीरे दोनों करीब आते हैं, लेकिन यश को अपने गैंग ने धोखा देकर समुद्र में फेंक दिया। आदिति विदेश चली जाती है, जहाँ उसकी मुलाकात याददाश्त खो चुके यश से होती है। वापस लौटने पर पता चलता है कि यश का भूलना एक नाटक था, वह सत्ता हथियाने की साजिश रच रहा था। आदिति भागने की कोशिश करती है, लेकिन यश उसे कैद कर लेता है और उसे पता चलता है कि वह गर्भवती है। क्या आदिति कभी आज़ाद हो पाएगी? क्या यश का प्यार कभी सच्चा था?
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इस एपिसोड की समीक्षा

लाल चादर का राज

बिस्तर पर लाल चादर का रंग बहुत गहरा लग रहा था। उसने उसे बहुत प्यार से सुलाया और कंबल ओढ़ा दिया। आज़ाद परिंदे में यह सीन दिखाता है कि कैसे देखभाल भी कभी-कभी बोझ लग सकती है। उसकी आंखों में चिंता साफ दिख रही थी। कमरे का माहौल बहुत शांत लेकिन तनावपूर्ण था। दीवार पर घड़ी की तस्वीर भी कुछ कहानी कह रही थी। मुझे यह पल बहुत अच्छा लगा क्योंकि इसमें बिना संवाद के भी सब समझ आ गया। सच में बेहतरीन अभिनय था।

चेहरे के भाव

जब वह उसके चेहरे को छूता है तो लगता है जैसे वह कुछ कहना चाह रहा हो। आज़ाद परिंदे के इस कड़ी में रिश्तों की जटिलताओं को बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है। उसकी आंखों में डर और उलझन दोनों थे। वह चुपचाप सब सह रही थी। शायद वह अभी ठीक महसूस नहीं कर रही थी। उस शख्स की कोशिशें साफ दिख रही थीं कि वह उसे मना रहा है। यह कार्यक्रम देखकर लगता है कि प्यार में कभी-कभी मजबूरियां भी आती हैं। बहुत ही गहरा सीन था।

खाने का पल

खाना पिलाने वाला सीन बहुत ही भावनात्मक था। वह खुद खाना नहीं खा रही थी तो उसने ध्यान से पिलाने की कोशिश की। आज़ाद परिंदे की कहानी में यह मोड़ बहुत अहम है। लगता है कि उनके बीच कोई पुरानी बात चल रही है। कमरे की रोशनी बहुत नरम थी जो माहौल को और गहरा बना रही थी। हिरण की मूर्तियां आगे में धुंधली दिख रही थीं जो एक अलग ही कलात्मक अहसास देती हैं। मुझे यह कार्यक्रम बहुत पसंद आ रहा है। हर पल में एक नया रहस्य छिपा है।

खामोश चीखें

उसकी आंखों में जो बेचैनी थी वह शब्दों से बयां नहीं हो सकती। आज़ाद परिंदे में किरदारों के बीच की दूरी को बहुत बारीकी से दिखाया गया है। वह बिस्तर पर लेटी थी पर उसका मन कहीं और था। उस शख्स ने हर तरीके से उसे सहलाने की कोशिश की। लाल चादर का रंग गुस्से और प्यार दोनों का प्रतीक लग रहा था। दीवार पर लगी तस्वीर भी कमरे की गंभीरता को बढ़ा रही थी। यह दृश्य देखकर दिल पर असर पड़ता है। सच में बहुत ही गजब का काम किया है।

कमरे की सजावट

कमरे का सजावट बहुत आधुनिक और शानदार लग रहा था। बड़ी खिड़कियों से बाहर का नज़ारा भी साफ दिख रहा था। आज़ाद परिंदे के सेट डिजाइन पर बहुत मेहनत की गई है। जब वह उसे गोद में उठाकर लाया तो लगा जैसे कोई परीकथा हो। लेकिन चेहरे के भाव बता रहे थे कि कहानी में कुछ गड़बड़ है। वह चुपचाप सब देख रही थी और कुछ बोल नहीं रही थी। यह खामोशी सबसे ज्यादा शोर मचा रही थी। मुझे यह सीन बहुत याद रहेगा।

हाथों की गर्माहट

उसने जब उसका हाथ थामा तो लगा जैसे वह टूटने से बचाना चाह रहा हो। आज़ाद परिंदे में रिश्तों की नाजुकता को बहुत खूबसूरती से पेश किया गया है। उसकी आवाज़ में नमी थी और उसकी आंखों में वादा। शायद वह माफी मांग रहा था या समझा रहा था। उसका चेहरा पीला पड़ गया था जैसे वह बीमार हो। बिस्तर पर बैठकर बात करना एक अलग ही नज़दीकियत बनाता है। यह कार्यक्रम देखने के लिए मजबूर कर देता है। हर कड़ी में नया मोड़ है।

रात का सन्नाटा

रात का वक्त था और कमरे में सिर्फ लैंप की रोशनी थी। आज़ाद परिंदे का यह सीन रात के सन्नाटे को बहुत अच्छे से कैद करता है। वह उसके पास बैठकर इंतज़ार कर रहा था कि वह कुछ बोले। लेकिन वह चुप रही। कभी-कभी खामोशी सबसे बड़ा जवाब होती है। उसकी उंगलियों में अंगूठी चमक रही थी जो शायद उनके रिश्ते की निशानी थी। मुझे यह विवरण बहुत अच्छा लगा। यह कार्यक्रम दिल को छू लेता है।

अभिनय की दास्तान

कलाकार का अभिनय बहुत स्वाभाविक और दमदार लग रहा था। आज़ाद परिंदे में किरदारों के जज़्बात को बिन बोले समझाया गया है। जब वह झुककर उससे बात करता है तो लगता है वह उसकी दुनिया है। लेकिन उसकी आंखों में वह चमक नहीं थी। शायद वह किसी गम में डूबी हुई थी। लाल रंग की चादर ने सीन को और भी नाटकीय बना दिया था। मुझे यह जोड़ी बहुत पसंद आ रही है। इनकी मित्रता देखने लायक है।

हिरण की मूर्ति

बिस्तर के पास रखे हिरण के खिलौने बहुत प्यारे लग रहे थे। आज़ाद परिंदे के सेट पर हर चीज़ की अपनी जगह है। वह उसे कंबल ओढ़ाकर खुद नीचे बैठ गया था। यह दिखाता है कि वह उसकी इज़्ज़त करता है। लेकिन माहौल में तनाव अभी भी बना हुआ था। खिड़की के बाहर शहर की रोशनी दिख रही थी। यह अकेलेपन को और बढ़ा रहा था। मुझे यह दृश्य बहुत गहरा लगा। यह कहानी आगे क्या मोड़ लेगी यह देखना दिलचस्प होगा।

उम्मीद की किरण

अंत में जब वह उसे खाना खिला रहा था तो लगा कि सब ठीक हो जाएगा। आज़ाद परिंदे की कहानी में उतार चढ़ाव बहुत हैं। वह धीरे से चम्मच लेकर उसके मुंह के पास ले गया। उसने मना नहीं किया बस चुपचाप देखती रही। यह उम्मीद और निराशा के बीच का पल था। कमरे की सजावट बहुत अमीराना थी पर दिल उदास थे। मुझे यह कार्यक्रम बहुत पसंद आया है। यह देखने के लिए मजबूर कर देता है कि आगे क्या होगा।