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आज़ाद परिंदेवां20एपिसोड

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आज़ाद परिंदे

अपनी चाची से बचने के लिए आदिति गैंगस्टर यश को फंसाती है। यश उसे अपने पास रोक लेता है। धीरे धीरे दोनों करीब आते हैं, लेकिन यश को अपने गैंग ने धोखा देकर समुद्र में फेंक दिया। आदिति विदेश चली जाती है, जहाँ उसकी मुलाकात याददाश्त खो चुके यश से होती है। वापस लौटने पर पता चलता है कि यश का भूलना एक नाटक था, वह सत्ता हथियाने की साजिश रच रहा था। आदिति भागने की कोशिश करती है, लेकिन यश उसे कैद कर लेता है और उसे पता चलता है कि वह गर्भवती है। क्या आदिति कभी आज़ाद हो पाएगी? क्या यश का प्यार कभी सच्चा था?
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इस एपिसोड की समीक्षा

दमदार दस्तक

काले कोट वाले शख्स की दस्तक देखकर रोंगटे खड़े हो गए। जैसे ही वह कमरे में आया, पूरा माहौल बदल गया। आज़ाद परिंदे का यह दृश्य बहुत ही तनावपूर्ण और दिलचस्प था। लड़की की आंखों में डर साफ दिख रहा था। ऐसे सुरक्षा वाले किरदार दर्शकों को बहुत पसंद आते हैं। बिखरे हुए नोट्स कहानी की गहराई बता रहे हैं। अगली कड़ी कब आएगी? यह जानने के लिए हम बेताब हैं। कमरे की रोशनी भी बहुत डरावनी लग रही थी।

भावनाओं का खेल

लड़की का गुस्सा और दर्द दोनों ही असली लग रहे थे। जब उसने कागज फेंका, तो लगा कुछ बड़ा राज खुलने वाला है। आज़ाद परिंदे में ऐसे मोड़ कहानी को रोचक बनाते हैं। काले कोट वाले शख्स की चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचा रही थी। क्या वह सच में दोषी है? यह सवाल हर किसी के मन में है। बिल्कुल नहीं छोड़ पा रहे हैं। हमें और देखना है।

पैसे का खेल

फर्श पर बिखरे हुए नोट्स देखकर हैरानी हुई। भूरे सूट वाले शख्स की हालत खराब थी। आज़ाद परिंदे की कहानी में रिश्वत या धमकी का पहलू हो सकता है। हीरो ने बिना एक शब्द बोले सबको सबक सिखा दिया। कार्रवाई और भावनाओं का बेहतरीन मिश्रण है यह। दृश्य की गुणवत्ता भी सिनेमा जैसी लग रही थी। बहुत शानदार लगा।

राज की बात

वह कागज क्या था? लड़की ने उसे पढ़कर क्यों गुस्सा किया? आज़ाद परिंदे के इस हिस्से में रहस्य बना हुआ है। काले कोट वाले शख्स का चेहरा पढ़ना मुश्किल था। क्या वह मदद कर रहा था या खुद ही खलनायक है? ऐसे मोड़ दर्शकों को बांधे रखते हैं। नेटशॉर्ट मंच पर ऐसी सामग्री मिलना सुकून देता है। बस जल्दी आगे बढ़े। हम इंतज़ार करेंगे।

केमिस्ट्री कमाल की

दोनों के बीच की दूरी और नज़दीकियां देखने लायक थीं। आज़ाद परिंदे में प्रेम और रोमांच का संगम बहुत खूबसूरत है। जब उसने उसका हाथ पकड़ा, तो बिजली सी दौड़ गई। लड़की की नाराजगी भी प्यार में छिपी लग रही थी। ऐसे दृश्य बार बार देखने को दिल करता है। अभिनय में दम है। सबने दिल जीत लिया।

विलेन की हालत

भूरे सूट वाले शख्स को देखकर हंसी भी आई और गुस्सा भी। उसने सोचा था सब आसान होगा। आज़ाद परिंदे में खलनायक को भी अच्छे से दिखाया गया है। हीरो की दस्तक ने सब पलट दिया। कमरे का अंधेरा माहौल डर पैदा कर रहा था। रोशनी और कोण बहुत कुशल हैं। ऐसे निर्माण मूल्य मिलना दुर्लभ है। बहुत पसंद आया।

चुप्पी का शोर

काले कोट वाले शख्स ने कुछ ज्यादा बोला नहीं, फिर भी सब कह दिया। आज़ाद परिंदे की पटकथा बहुत मजबूत लग रही है। लड़की की आंखों में आंसू और गुस्सा दोनों थे। क्या वह उसे माफ कर पाएगी? यह सवाल बना हुआ है। ऐसे भावनात्मक दृश्य दिल को छू लेते हैं। बिल्कुल अलग अंदाज है यह। हमें और चाहिए।

विजुअल ट्रीट

हर छवि इतनी खूबसूरत थी कि चित्र लेने को मन किया। आज़ाद परिंदे के छायांकन ने कहानी को और गहरा किया। कमरे की सेटिंग और कपड़ों का चयन बहुत सटीक था। काले कोट वाला शख्स बहुत आकर्षक लग रहा था। ऐसे दृश्य देखकर मजा आ गया। नेटशॉर्ट मंच पर दृश्य बिना रुकावट चल रहे थे। अनुभव अच्छा रहा।

कहानी का मोड़

लगा था सब ठीक हो जाएगा, पर लड़की की प्रतिक्रिया कुछ और ही थी। आज़ाद परिंदे में हर पल नया मोड़ आ रहा है। कागज के टुकड़े ने सब बदल दिया। काले कोट वाले शख्स की परेशानी साफ दिख रही थी। क्या वह अपनी गलती सुधार पाएगा? यह जानने की उत्सुकता बढ़ रही है। बस यही चाहते हैं। जल्दी लाएं।

इंतज़ार नहीं हो रहा

दृश्य खत्म हुआ तो मन नहीं भरा। आज़ाद परिंदे का अगला भाग कब आएगा? ऐसे अधूरेपन दर्शकों को पागल बना देते हैं। लड़की और हीरो के बीच की कशमकश देखनी है। हर कड़ी के बाद उत्सुकता बढ़ जाती है। ऐसे शो को मिस नहीं करना चाहिए। बिल्कुल लाजवाब अनुभव रहा यह। सबको देखना चाहिए।