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(डबिंग) बदले की आग में पका खानावां10एपिसोड

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(डबिंग) बदले की आग में पका खाना

शेफ लक्ष्य खन्ना, जो कभी "कुकिंग के बादशाह" थे, अपनी पत्नी की कार दुर्घटना में मृत्यु के बाद टूट गए। अवसाद से वे बेघर हो गए और कुत्ते 'शेरू' के अलावा सब कुछ खो दिए। किचन में काम करते समय एक सु-शेफ ने उन्हें प्रताड़ित किया, एक दुष्ट व्यवसायी ने उन्हें वापसी के लिए मजबूर किया। विश्वासघात और शेरू की हत्या के बाद लक्ष्य ने बदला लेने के लिए अपना चाकू उठा लिया।
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इस एपिसोड की समीक्षा

लॉबस्टर और ज़िंदगी का रिश्ता

कितना अजीब संयोग है कि एक मछुआरा अब शेफ बन गया है। लड़की का कहना कि 'तुम लॉबस्टर का छिलका निकालने में अच्छे हो', सिर्फ तारीफ नहीं, बल्कि उसके अंदर के टैलेंट को पहचानना है। (डबिंग) बदले की आग में पका खाना में ऐसे मोड़ आते हैं जो सोचने पर मजबूर कर दें। लक्ष्य का डर और उसका प्यार दोनों ही असली लगते हैं। क्या वह अपने अतीत से बाहर आ पाएगा?

किसी के जाने के बाद...

लक्ष्य की चुप्पी में जो शोर है, वह किसी को नहीं सुनाई देता। वह अपनी पत्नी की यादों में जी रहा है, लेकिन यह लड़की उसे वर्तमान में वापस लाने की कोशिश कर रही है। (डबिंग) बदले की आग में पका खाना का यह सीन बहुत इमोशनल था। जब वह कहती है कि 'तुम्हारी पत्नी कभी नहीं चाहेगी कि तुम ऐसे जियो', तो लगता है जैसे मौत के बाद भी प्यार जिंदा रहता है।

प्यार या गिल्ट?

लक्ष्य और इस लड़की के बीच जो केमिस्ट्री है, वह सिर्फ आकर्षण नहीं, बल्कि दो टूटे हुए दिलों का मिलन है। वह उसे अपने रेस्टोरेंट में काम देने की बात करता है, शायद उसे लगता है कि इससे वह अपने आप को माफ़ कर पाएगा। (डबिंग) बदले की आग में पका खाना में ऐसे रिश्ते दिखाए गए हैं जो समाज की नजरों में गलत लग सकते हैं, लेकिन दिल की नजर में सही हैं।

अतीत का साया

लक्ष्य जब कहता है 'मैं ठीक हूँ', तो उसकी आवाज़ में कांप है। वह झूठ बोल रहा है, खुद से और इस लड़की से भी। (डबिंग) बदले की आग में पका खाना में दिखाया गया है कि कैसे इंसान अपने गुनाहों से भागता है, लेकिन वे उसका पीछा नहीं छोड़ते। यह लड़की शायद उसकी किस्मत बदलने वाली है, या शायद और गहरा धकेलने वाली।

एक चुंबन, हजार सवाल

जब लक्ष्य और वह लड़की एक-दूसरे को चूमते हैं, तो लगता है जैसे समय थम गया हो। लेकिन क्या यह प्यार है या सिर्फ अकेलेपन का मरहम? (डबिंग) बदले की आग में पका खाना में ऐसे सीन्स हैं जो दर्शक को सोचने पर मजबूर कर दें। लक्ष्य का कहना 'हमें ऐसा नहीं करना चाहिए' और फिर भी करना, यह इंसानी कमजोरी है या मजबूरी?

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