वीडियो में लक्ष्य का चेहरा पत्थर जैसा है जब बाकी सब चिल्ला रहे हैं। उसकी आंखों में पछतावा नहीं, बल्कि एक अजीब सी संतुष्टि दिख रही है। जब दूसरे शेफ उसे पकड़कर धमका रहे हैं, तो वह हिला तक नहीं। (डबिंग) बदले की आग में पका खाना वाला यह ड्रामा बताता है कि शायद जीत से ज्यादा जरूरी उसे किसी और का नुकसान करना था। क्या यह ईर्ष्या थी या कोई पुरानी दुश्मनी?
जतिन कपूर का अंदाज ही कुछ और है। रंग-बिरंगी शर्ट, सोने की चेन और खाने पर ऐसा रिएक्शन जैसे किसी ने जहर मिला दिया हो। उनका यह कहना कि 'जीत से बस इतनी दूर है शेफ' और फिर हार का ऐलान करना, सब कुछ स्क्रिप्टेड लगता है। (डबिंग) बदले की आग में पका खाना देखकर लगता है कि यह प्रतियोगिता सिर्फ खाने की नहीं, इमोशन्स की भी है।
जब बाकी सब परेशान थे, तो रेड हैट वाला शेफ मुस्कुरा रहा था। क्या उसे पहले से पता था कि खाने में कुछ गड़बड़ है? या शायद वह लक्ष्य का साथी है? उसकी चुप्पी और संतोषजनक मुस्कान सब कुछ बता रही है। (डबिंग) बदले की आग में पका खाना वाला यह मोड़ कहानी को पूरी तरह बदल देता है। क्या यह साजिश थी या सिर्फ एक गलती?
लाल बालों वाली महिला शेफ का गुस्सा सिर्फ हार का नहीं, बल्कि धोखे का है। जब वह लक्ष्य से कहती है कि 'मैं तुम्हें नहीं छोडूंगी', तो लगता है कि उनके बीच कुछ और भी चल रहा है। (डबिंग) बदले की आग में पका खाना देखकर उसका दर्द साफ झलकता है। क्या लक्ष्य ने उसे भी धोखा दिया है? यह रिश्ता अब टूट चुका है।
जब जज ने खाना खाया और तुरंत खट्टा बताया, तो लगा कि शायद खाने में वाकई कुछ गड़बड़ थी। लेकिन लक्ष्य की प्रतिक्रिया देखकर लगता है कि यह जानबूझकर किया गया था। (डबिंग) बदले की आग में पका खाना वाला यह सीन बताता है कि कभी-कभी जीत से ज्यादा जरूरी बदला होता है। क्या लक्ष्य ने अपने ही टीम को हराया?