दुल्हन के चेहरे पर खुशी नहीं बल्कि डर साफ दिख रहा था। शादी के दिन ऐसा माहौल क्यों है?सास का व्यवहार भी बहुत संदेहजनक लग रहा था। टूटी हुई तस्वीर ने तो दिल ही तोड़ दिया। प्रतिशोध: एक अधूरी दुल्हन में ऐसे मोड़ देखकर हैरानी हुई। कहानी में बहुत गहराई है और हर किरदार अपनी जगह महत्वपूर्ण लगता है। यह सिर्फ एक शादी नहीं बल्कि एक साजिश लग रही है। मुझे लगता है कि दुल्हन को किसी बड़े खतरे का अहसास हो चुका है। अब वह चुप नहीं बैठेगी।
सास ने चूड़ा दुल्हन को नहीं बल्कि दूसरी लड़की को पहनाया। यह अपमान किसी और लेवल का था। दुल्हन सीढ़ियों पर खड़ी बस देखती रही। उसकी आंखों में आंसू थे पर आवाज नहीं निकली। प्रतिशोध: एक अधूरी दुल्हन की कहानी में परिवार के राज छिपे हैं। मुझे लगता है कि यह चूड़ा किसी बड़े रहस्य की कुंजी है। कौन है असली दुल्हन?यह सवाल दिमाग में घूम रहा है। रिश्तों की यह कड़वाहट देखकर बुरा लगा। सब कुछ इतना खुला क्यों है?
फोन को डिब्बे के पीछे छिपाना बहुत सस्पेंस बना रहा था। दुल्हन कुछ खोज रही थी शादी से पहले। बालकनी पर फोन कॉल ने तनाव को बढ़ा दिया। क्या उसे कोई खबर मिली है?प्रतिशोध: एक अधूरी दुल्हन में हर दृश्य में एक नया सवाल खड़ा होता है। मुझे यह रोमांचक कहानी पसंद आ रही है। काश जल्दी पता चले कि आखिर चल क्या रहा है इस घर में। दुल्हन की घबराहट साफ दिख रही थी। वह अकेली पड़ गई है इस जंग में। सब कुछ इतना गुप्त क्यों है।
दूल्हा शांत खड़ा था जबकि दुल्हन तनाव में थी। यह जोड़ी कितनी अलग लग रही थी। शायद दूल्हे को कुछ पता नहीं है या वह हिस्सा है। टूटी फ्रेम देखकर दुल्हन की चीख सुनाई दी बिना आवाज के। प्रतिशोध: एक अधूरी दुल्हन का अंत बहुत तेज था। रिश्तों की यह नाटकबाजी देखकर गुस्सा आ रहा है। सच्चाई सामने आएगी जरूर। दुल्हन की आंखों में अब सवाल हैं। वह जवाब मांगेगी। यह अन्याय बर्दाश्त नहीं होगा। अब लड़ाई शुरू होगी।
लाल गुब्बारे और सजावट के बीच दुल्हन का सफेद लिबास अकेला पड़ गया। दृश्य विरोधाभास बहुत अच्छा था। निर्देशक ने रंगों का इस्तेमाल भावनाओं दिखाने के लिए किया। प्रतिशोध: एक अधूरी दुल्हन की छायांकन भी तारीफ के लायक है। हर फ्रेम में एक कहानी कही गई है। दुल्हन की अकेलापन साफ झलक रहा था उस भीड़ में भी। खुशी के माहौल में उदासी छाई हुई है। यह विरोधाभास बहुत गहरा है। दर्शक को यह बात बहुत प्रभावित करती है। मन पर असर पड़ता है।