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प्रतिशोध: एक अधूरी दुल्हनवां47एपिसोड

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प्रतिशोध: एक अधूरी दुल्हन

पूर्व जन्म में, रिया शर्मा और उसकी सहेली रोशनी वर्मा की विवाह के दिन ससुराल वालों और विक्रम सिंघानिया के षड्यंत्र में मृत्यु हो जाती है। पुनर्जन्म पाकर रिया अपनी शादी से पहले रोशनी को सुरक्षित भेज देती है और मामा राकेश शर्मा को बुलाती है। रिया की ननद जाह्नवी गलती से कमरे में जाती है, जहाँ विक्रम उसे रोशनी समझकर दुर्व्यवहार करता है। पति चिराग और सास कमला जाह्नवी को रोशनी समझकर रिया को प्रताड़ित करते हैं। मामा के आने पर सच खुलता है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

शादी के कमरे में पुलिस का प्रवेश

शादी के कमरे में पुलिस का आना किसी बुरे सपने जैसा लग रहा था। वर को हथकड़ी लगाते देख दिल दहल गया। यह दृश्य बताता है कि कैसे खुशी के पल में गम छिपा होता है। प्रतिशोध: एक अधूरी दुल्हन ने सच में दिल छू लिया। पुलिस वाले की सख्ती और दुल्हन की आंखों में आंसू देखकर रोंगटे खड़े हो गए। ऐसा लग रहा था कि सब कुछ पल भर में बदल गया। बहुत ही कठिन दृश्य था। दीवारों पर लगी खुशी की सजावट अब अजीब लग रही थी।

हरे कोट वाली लड़की का दर्द

हरे कोट वाली लड़की का चेहरा देखकर लग रहा था कि वह सब जानती थी। उसकी चुप्पी में बहुत शोर था। जब पुलिस ने कागजात दिखाए तो सबकी सांसें रुक गईं। प्रतिशोध: एक अधूरी दुल्हन की कहानी में यह मोड़ बहुत जरूरी था। दोस्त का हाथ थामे खड़ी होना दिखाता है कि मुश्किल वक्त में कौन साथ खड़ा होता है। अभिनय बहुत स्वाभाविक लगा। सहेली का सहारा मिलना सबसे बड़ी ताकत थी उस पल। हर भावना को पर्दे पर बहुत अच्छे से उतारा गया है।

कागजात में छिपा सच

सबूत के कागजात देखकर हैरानी हुई कि कैसे भ्रष्टाचार ने एक परिवार को तोड़ दिया। वर की आंखों में डर साफ दिखाई दे रहा था। पुलिस की कार्रवाई बहुत तेज थी। प्रतिशोध: एक अधूरी दुल्हन में ऐसे दृश्य देखकर लगता है कि न्याय जरूर मिलता है। लाल रंग की सजावट और काले सच के बीच का विरोधाभास बहुत गहरा था। बिल्कुल नहीं सोचा था कि अंत ऐसा होगा। सच्चाई सामने आते ही सबकी बोलती बंद हो गई।

पुलिस का सख्त रवैया

पुलिस वाले का रवैया बहुत सख्त था, मानो वह किसी अपराधी को नहीं छोड़ेंगे। वर के गिरगिराने से कोई फर्क नहीं पड़ा। सच्चाई सामने आते ही सब चुप हो गए। प्रतिशोध: एक अधूरी दुल्हन ने दिखाया कि कानून की पकड़ से कोई नहीं बच सकता। कमरे की सजावट अब बेमानी लग रही थी। यह दृश्य दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देता है। बहुत ही ताकतवर दृश्य था। कानून की राह में कोई नहीं आ सकता।

सहेली का साथ अनमोल

सफेद ऊनी जैकेट वाली सहेली ने जिस तरह से साथ खड़े होकर समर्थन किया, वह देखने लायक था। दोस्ती की मिसाल कायम कर दी। वर की हालत देखकर तरस आ रहा था। प्रतिशोध: एक अधूरी दुल्हन में रिश्तों की अहमियत को बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है। आंसू पीकर भी मुस्कुराने की कोशिश दिल को छू गई। ऐसे नाटक कम ही देखने को मिलते हैं। मुश्किल घड़ी में दोस्त ही परिवार होता है।

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