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प्रतिशोध: एक अधूरी दुल्हनवां8एपिसोड

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प्रतिशोध: एक अधूरी दुल्हन

पूर्व जन्म में, रिया शर्मा और उसकी सहेली रोशनी वर्मा की विवाह के दिन ससुराल वालों और विक्रम सिंघानिया के षड्यंत्र में मृत्यु हो जाती है। पुनर्जन्म पाकर रिया अपनी शादी से पहले रोशनी को सुरक्षित भेज देती है और मामा राकेश शर्मा को बुलाती है। रिया की ननद जाह्नवी गलती से कमरे में जाती है, जहाँ विक्रम उसे रोशनी समझकर दुर्व्यवहार करता है। पति चिराग और सास कमला जाह्नवी को रोशनी समझकर रिया को प्रताड़ित करते हैं। मामा के आने पर सच खुलता है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

शादी में बड़ा हंगामा

शादी के दिन ऐसा हंगामा किसी की उम्मीद नहीं होती। दुल्हन की हालत देखकर बहुत बुरा लगा, वह कुछ बोलना चाह रही थी पर रुक गई। दुल्हा के चेहरे पर हैरानी साफ दिख रही थी। परिवार के बीच की यह लड़ाई कहां तक जाएगी। प्रतिशोध एक अधूरी दुल्हन नामक इस शो में ऐसे मोड़ देखकर मजा आ रहा है। मुझे जानना है कि वह कागज किस बारे में था। सभी के चेहरे के भाव बहुत गहरे थे। यह दृश्य बहुत तनावपूर्ण है।

लाल कपड़े वाली महिला का गुस्सा

लाल कपड़े वाली महिला का गुस्सा देखकर डर लग रहा था। वह किसी को बख्शने वाली नहीं लग रही थीं। दुल्हन को पकड़कर रखना सही नहीं लगा। शायद उसे सच बोलने का मौका नहीं दिया गया। इस शो प्रतिशोध एक अधूरी दुल्हन में हर किरदार की अपनी मजबूरी है। बाहर खड़े लोग कौन हैं और क्यों आए, यह जानना जरूरी है। माहौल बहुत गर्म हो गया है। सबकी नजरें एक दूसरे पर थीं। कोई कुछ बोल नहीं पा रहा था।

हरे सूट वाले का एंट्री

हरे सूट वाले व्यक्ति ने बीच में आकर सबको चौंका दिया। उसकी आंखों में दुल्हन के लिए चिंता साफ दिख रही थी। क्या वह दुल्हन को बचाने आया था। दुल्हा हैरान होकर देखता रहा। यह कहानी बहुत पेचीदा होती जा रही है। प्रतिशोध एक अधूरी दुल्हन में ऐसे ड्रामा देखकर मजा आता है। हर किसी के बीच कुछ न कुछ चल रहा है। मुझे अगली कड़ी का इंतजार है। सबके बीच की दूरी बढ़ती जा रही है। रिश्तों में दरारें साफ दिख रही हैं।

दरवाजे पर दस्तक के बाद

दरवाजे पर दस्तक के बाद जो लोग आए वह किसी ताकतवर जैसे लग रहे थे। काले चश्मे वाले लोग माहौल को और डरावना बना रहे थे। बूढ़े आदमी की आवाज में बहुत दबदबा था। दुल्हन की आंखों में आंसू देखकर दिल पसीज गया। प्रतिशोध एक अधूरी दुल्हन की कहानी में यह सबसे तनावपूर्ण पल है। सब कुछ इतनी तेजी से बदल गया। कोई नहीं जानता था कि ऐसा होगा। सबकी सांसें रुक गई थीं। यह पल बहुत यादगार बन गया है।

जमीन पर गिरा कागज

जमीन पर गिरा हुआ कागज किसी राज की कुंजी लग रहा था। दुल्हे ने उसे उठाने की कोशिश की पर रुक गया। शायद उसमें कुछ ऐसा था जो सब बदल देगा। दुल्हन चुपचाप सब सह रही थी। प्रतिशोध एक अधूरी दुल्हन में ऐसे सीन देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। परिवार के रिश्ते कितने जटिल होते हैं। मुझे लगता है कि सच जल्दी सामने आएगा। सबको अपनी गलती का अहसास हो रहा है। कहानी बहुत रोचक हो गई है।

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