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प्रतिशोध: एक अधूरी दुल्हनवां20एपिसोड

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प्रतिशोध: एक अधूरी दुल्हन

पूर्व जन्म में, रिया शर्मा और उसकी सहेली रोशनी वर्मा की विवाह के दिन ससुराल वालों और विक्रम सिंघानिया के षड्यंत्र में मृत्यु हो जाती है। पुनर्जन्म पाकर रिया अपनी शादी से पहले रोशनी को सुरक्षित भेज देती है और मामा राकेश शर्मा को बुलाती है। रिया की ननद जाह्नवी गलती से कमरे में जाती है, जहाँ विक्रम उसे रोशनी समझकर दुर्व्यवहार करता है। पति चिराग और सास कमला जाह्नवी को रोशनी समझकर रिया को प्रताड़ित करते हैं। मामा के आने पर सच खुलता है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

दुल्हन का दर्द

दुल्हन की माथे पर चोट देखकर दिल दहल गया। वह खड़ी है जैसे सब कुछ टूट गया हो। बिस्तर पर पड़ी लाश किसकी है?यह सवाल हर दृश्य में गूंजता है। प्रतिशोध: एक अधूरी दुल्हन ने मुझे सोने नहीं दिया। रात भर बस यही सोचती रही कि आखिर हुआ क्या है। अभिनय बहुत वास्तविक लगता है। हर भाव में दर्द साफ झलकता था। मुझे यह कहानी बहुत पसंद आई। देखने वाले को बांधे रखती है।

मां का गुस्सा

लाल कपड़ों वाली मां का गुस्सा साफ दिख रहा है। शायद वह सब जानती है। परिवार के राज बाहर आ रहे हैं। नेटशॉर्ट ऐप पर यह नाटक देखना मेरी आदत बन गई है। हर कड़ी में नया मोड़। मां का प्रतिक्रिया देखकर लगता है कि असली खेल तो अब शुरू होगा। बहुत ही दमदार दृश्य है। प्रतिशोध: एक अधूरी दुल्हन में ऐसा किरदार निभाना आसान नहीं था। बहुत प्रभावशाली है।

दूल्हे की हैरानी

चश्मे वाले दूल्हे की हैरानी नकली नहीं लग रही। क्या वह सच में अनजान है या नाटक कर रहा है?हरी पोशाक वाले शख्स से बहस देखकर तनाव बढ़ गया। प्रतिशोध: एक अधूरी दुल्हन की कहानी में हर किरदार संदेह के घेरे में है। मुझे नहीं पता कि किस पर भरोसा करूं। बस देखते रहना चाहती हूं। रहस्य बना हुआ है। बहुत रोमांचक है। देखने में मजा आता है।

रंगों का खेल

शादी की सजावट और खून का रंग एक दूसरे के विपरीत हैं। लाल रोशनी में यह त्रासदी और भी गहरी लगती है। सेट डिजाइन बहुत अच्छा है। बिस्तर पर पड़ी लाश की हालत देखकर रूह कांप गई। यह कार्यक्रम सिर्फ मनोरंजन नहीं, एक गहरी कहानी है। मुझे यह अवधारणा बहुत पसंद आया। प्रतिशोध: एक अधूरी दुल्हन का दृश्य बहुत अच्छा है। कलाकारी बेमिसाल है।

गुस्से की आग

हरी पोशाक वाले व्यक्ति का गुस्सा जायज लग रहा है। वह दूल्हे से सवाल पूछ रहा है। कमरे में खड़ी हर शख्सियत के चेहरे पर डर है। प्रतिशोध: एक अधूरी दुल्हन में भावनात्मक नाटक बहुत तेज है। मुझे लगा कि मैं भी उस कमरे में खड़ी हूं। इतना रहस्य कम ही देखने को मिलता है। बहुत रोमांचक है। देखने में मजा आता है। सब अच्छा लगा।

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