शुरू में लगा ये बस एक साधारण कीड़ा है, लेकिन जब उसने उस नीले पक्षी को चुनौती दी, तो सबकी सांसें रुक गईं। सुनहरी बालों वाली छात्रा का गुस्सा और खून से सना मुंह देखकर डर लगा। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज में ऐसे ट्विस्ट उम्मीद से बाहर हैं। जादू की तलवार और बूढ़े शिक्षक की एंट्री ने माहौल बदल दिया। कार्टून की क्वालिटी भी कमाल की है। यह कहानी बहुत रोचक लग रही है और हर दृश्य में नया कुछ है।
जब उस छात्रा ने अपना लाल पत्ता निकाला, तो लगा अब कीड़े का खेल खत्म। लेकिन कहानी में ऐसा मोड़ आया कि कोई सोच भी नहीं सकता। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज की ये कड़ी सबसे शानदार है। उसकी आंखों में जो आग थी, वो साफ दिख रही थी। अंत में बड़े जादूगर का आना सही लगा। दर्शकों के रूप में हमें यह जानने की उत्सुकता है कि आगे क्या होगा।
ये मैदान बिल्कुल प्राचीन रंगशाला जैसा लग रहा था। सफेद बाघ और नीले पक्षी की लड़ाई का दृश्य शानदार था। बीच में मध्यस्थ ने जब प्रतियोगिता रोकी, तो लगा कुछ गड़बड़ है। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज में हर पल नया सस्पेंस है। सफेद बालों वाली लड़की शांत खड़ी रहकर सबको हैरान कर रही थी। ऐसा लगता है कि यह स्कूल किसी जादूई दुनिया का हिस्सा है।
जब वो नीली तलवार हवा में तैरने लगी और फिर आग पकड़ ली, तो मज़ा आ गया। ऐसा लग रहा था जैसे कोई प्राचीन शक्ति जाग गई हो। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज के दृश्यों पर कोई शक नहीं। बूढ़े मास्टर ने ढाल लगाकर कीड़े को बचाया, इसका मतलब वो साधारण नहीं है। तलवार की चमक ने पूरे मैदान को रोशन कर दिया था उस पल।
वो लड़की इतनी शांत क्यों थी? जब सब चिल्ला रहे थे, बस वो ही खड़ी थी। उसकी आंखों में एक अलग ही चमक थी। शायद वो कीड़े से जुड़ी हो। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज में किरदारों के बीच का रिश्ता समझना मुश्किल है। अंत में आसमान में जो चेहरा आया, वो किसका था? उसकी चुप्पी सबके शोर से ज्यादा भारी लग रही थी उस वक्त।
जब लड़ाई बढ़ने लगी, तो शिक्षकों के चेहरे पर डर साफ था। मध्यस्थ ने बीच में आकर लड़ाई रोकी, वरना कीड़ा पिचक जाता। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज में शक्ति स्तर का खेल देखने लायक है। हरे कोट वाले बूढ़े शिक्षक की शक्ति सबसे ज्यादा लग रही है अभी। बड़े लोगों की चिंता बताती है कि खतरा कितना गंभीर हो सकता है।
सुनहरी बालों वाली छात्रा के मुंह से खून बह रहा था, फिर भी वो हारी नहीं मान रही थी। ये जिद्द देखकर सम्मान आ गया। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज में भावनात्मक नाटक भी अच्छा है। जादू की रोशनी और धमाके देखकर लगा सिनेमाघर में हूं। नेटशॉर्ट पर ऐसे शो कम ही मिलते हैं। ऐसी लड़ाईयां इंसान के अंदर के जज्बात को भी हिला देती हैं।
शुरू में वो बेचारा सा लग रहा था, फिर अचानक सब उसे मारने पर तुल गए। शायद उसमें कोई छिपी शक्ति है। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज की कहानी धीरे धीरे खुल रही है। जादूई सर्कल और बुलावे ने सबको चौंका दिया। अगली कड़ी कब आएगी? हर छोटी चीज़ अब बड़े रहस्य का हिस्सा बनती जा रही है।
रंगों का इस्तेमाल और जादू के प्रभाव बहुत सुंदर हैं। नीली रोशनी और आग की तलवार का मेल आंखों को सुकून देता है। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज को बड़े पर्दे पर देखना चाहिए। मैदान का नक्शा भी बहुत विस्तृत और भव्य लग रहा था हर कोने में। कलाकारों ने हर जादू को बहुत बारीकी से दिखाया है यहाँ।
आसमान में जो बूढ़े व्यक्ति की परछाई आई, वो जरूर कोई बड़ा खलनायक या मार्गदर्शक होगा। कीड़े का क्या होगा ये सबसे बड़ा सवाल है। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज का अंत पास आ रहा है। सभी छात्रों की शक्तियां अब खुलकर सामने आएंगी। मज़ा आने वाला है। अब तो बस यही देखना है कि अंत में जीत किसकी होती है।