सफेद बालों वाली लड़की की मुस्कान देखकर लगता है सब ठीक है, लेकिन आंखों में पसीना साफ दिख रहा है। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज में ऐसे सीन दिलचस्प लगते हैं जब पात्र छुपाते हैं असली भाव। अंगूठा दिखाते हुए उसका चेहरा देखकर हंसी रुक नहीं रही। स्कूल वर्दी में वो काफी प्यारी लग रही थी उस पल। ये डर और खुशी का मिश्रण था।
सुनहरे बालों वाली लड़की का गुस्सा देखकर डर लग रहा था, टेबल पर मुक्का मारते ही सब कुछ टूट गया। ऐसे क्रोध का प्रदर्शन शायद ही किसी नाटक में देखा हो। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज की कहानी में ये मोड़ अचानक आया। टूटे हुए बर्तन और उसकी आंखों की चमक बता रही थी कि अब कुछ बड़ा होने वाला है जरूर। दर्शक हैरान रह गए।
सेवक की शांति देखकर हैरानी हुई, सब कुछ टूट रहा था पर वो झाड़ू लगाते रहे। उनकी इसी खामोशी ने सीन को और भी तनावपूर्ण बना दिया। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज में किरदारों का व्यवहार अजीब है। रात के समय बैठक कक्ष में ये सफाई का नज़ारा किसी पहेली से कम नहीं लग रहा था वहां। वो चुपचाप काम कर रहा था।
जब सुनहरे बालों वाली लड़की के दांत नुकीले दिखे तो रोंगटे खड़े हो गए, ये इंसान नहीं लग रही थी। गुस्से में उसका चेहरा बदल गया था पूरी तरह से। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज में ऐसे ट्विस्ट उम्मीद नहीं थे। दृश्य ने निकट दृश्य लेकर डर का माहौल बना दिया था उस वक्त। दर्शक भी डर गए होंगे ये देखकर। सच में डरावना था।
गुफा का दृश्य बहुत रहस्यमयी था, सफेद बालों वाली लड़की अकेले खड़ी थी। वहां की रोशनी और पत्थर सब कुछ अलग लग रहा था। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज में जगह बदलते ही कहानी में जान आ गई। उसने हाथ में कुछ पकड़ा हुआ था जो शायद कोई जादुई चीज थी। वातावरण बहुत शांत लेकिन डरावना था।
चांदी की तरह दिखने वाला कीड़ा बहुत प्यारा लेकिन अजीब था, उसके भाव इंसानों जैसे थे। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज में ये प्राणी मुख्य भूमिका निभा रहा है। उसकी आंखें और सींग देखकर लगता है वो कुछ बोलना चाहता है। चित्रण शैली काफी अनोखा है। बच्चों को ये पसंद आएगा।
लाल रंग के कीड़े जमीन से निकलते देखकर अजीब लगा, वो सोना उगल रहे थे। ये दृश्य किसी खजाने की खोज जैसा लग रहा था। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज में संसाधनों का ये खेल दिलचस्प है। चांदी वाले कीड़े ने उन्हें हुकुम दिया था सब कुछ करने के लिए। ये साम्राज्य बनाने जैसा है।
पीले क्रिस्टल को हाथ में पकड़ते हुए दृश्य बहुत सुंदर था, वो शक्ति का प्रतीक लग रहे थे। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज में ये संसाधन ही सब कुछ हैं। ऐसे चमकते पत्थर देखकर कोई भी लालच कर सकता है। हाथ की पकड़ से लग रहा था ये कीमती हैं। इनकी चमक आंखों को चुभ रही थी।
जब लड़की के कंधे पर कीड़ा आया और पर्दा जैसी चीज दिखी तो हैरानी हुई। ये तकनीक और जादू का मिश्रण लग रहा था। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज में तंत्र का इस्तेमाल नया है। नीली रोशनी वाले प्रदर्शन ने सीन को विज्ञान कथा बना दिया। यह भविष्य का संकेत हो सकता है। सब कुछ बदल गया।
स्कूल से लेकर गुफा तक का सफर बहुत तेज था, कहानी कहीं भी बोर नहीं करती। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज में हर सीन में कुछ नया है। पात्रों के बीच का तनाव और फिर ये कीड़ों वाली दुनिया सब कुछ अनोखा है। देखने वाला हर पल बंधा रहता है। अंत क्या होगा ये जानना है।