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पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराजवां43एपिसोड

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पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज

आदित्य गलती से एक चालाक पिस्सू बनकर जन्म लेता है। खून चूसकर वह ताकत हासिल करता है, उसके शरीर पर नए निशान उभरते हैं, और एक दिन वह पंख निकालकर आसमान में उड़ेगा। वह हर मुश्किल से बचने के लिए सैकड़ों चालें चलता है। गुप्त अकादमी की ठंडी स्वभाव वाली छात्रा तारा सिंह, जो बाहर से सख्त लेकिन अंदर से कोमल है, उसके भाग्य से जुड़ जाती है। देखते हैं यह छोटा पिस्सू पूरे संसार में तूफान कैसे खड़ा करता है, खून चूसकर देवराज बनता है, और अपनी धमाकेदार कहानी लिखता है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

कीड़े का विकास कमाल का है

इस एनिमे में कीड़े का विकास देखकर हैरानी हुई। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज में सिस्टम इंटरफेस बहुत आधुनिक लगता है। जब कीड़ा खून चूसकर अंक प्राप्त करता है, तो लगता है कि यह कोई वीडियो गेम है। एनिमेशन की गुणवत्ता भी बहुत अच्छी है और रंगों का उपयोग आंखों को सुकून देता है। दर्शकों को यह शैली बहुत पसंद आएगी क्योंकि इसमें नयापन है और कहानी रोचक है। हर दृश्य में बारीकियों का ध्यान रखा गया है जो प्रशंसनीय है।

सफेद बालों वाली लड़की बहुत प्यारी है

सफेद बालों वाली लड़की की अभिव्यक्तियां बहुत प्यारी हैं। जब उसे वह नीली बोतल मिलती है, तो उसकी खुशी देखने लायक होती है। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज में पात्रों के बीच का रिश्ता धीरे-धीरे विकसित हो रहा है। कमरे का माहौल बहुत शांत और सुंदर दिखाया गया है। रात की रोशनी में उसका चेहरा और भी खूबसूरत लग रहा था और शांति थी। पृष्ठभूमि संगीत भी इस माहौल को और भी सुंदर बना रहा था।

नीली बोतल का रहस्य क्या है

वह नीली बोतल जिसमें चमकदार तरल है, बहुत रहस्यमयी लगती है। ऐसा लगता है कि इसमें कोई जादुई शक्ति छिपी है। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज की कहानी में यह बोतल महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। लड़की इसे पीने वाली है या कीड़े को देगी, यह देखना दिलचस्प होगा। इसका असर क्या होगा यह जानने की उत्सुकता बढ़ रही है। आगे की कहानी में इसका खुलासा होना बाकी है।

एरीना का दृश्य बहुत रोमांचक था

शुरुआत में एरीना का दृश्य बहुत रोमांचक था। बड़ा नीला पक्षी और फिर कीड़े का हमला देखकर रोमांच बढ़ गया। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज में एक्शन और जादू का मिश्रण बहुत अच्छा है। लड़की के बेहोश होने के बाद कहानी में एक नया मोड़ आता है जो दर्शकों को बांधे रखता है। हर पल कुछ नया होता है जो बोरियत नहीं होने देता और मजा आता है। दृश्य परिवर्तन बहुत सहज और प्राकृतिक लगता है।

सिस्टम पॉइंट्स का कॉन्सेप्ट नया है

खून चूसकर ऊर्जा और जीवन बढ़ाने का कॉन्सेप्ट बहुत अनोखा है। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज में यह सिस्टम कहानी को आगे बढ़ाता है। जब स्क्रीन पर अंक दिखाई देते हैं, तो लगता है कि पात्र का स्तर बढ़ गया है। यह गेमिंग तत्व एनिमे में नयापन लाता है। दर्शकों को यह सिस्टम बहुत पसंद आ रहा है क्योंकि यह समझने में आसान और रोचक है। इससे कहानी में गति बनी रहती है।

कीड़े के चेहरे के भाव बहुत अच्छे हैं

कीड़े के चेहरे के भाव बहुत इंसानी लगते हैं। जब वह नीली बोतल देखता है तो उसकी खुशी साफ दिखती है। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज में पात्रों के डिजाइन बहुत विस्तृत हैं। कीड़े का कवच बदलना और चमकदार आंखें देखकर लगता है कि यह कोई साधारण जीव नहीं है। इसके डिजाइन में बहुत मेहनत लगाई गई है जो स्क्रीन पर साफ झलकती है और अच्छा लगता है। कलाकारों की मेहनत साफ दिखती है।

रात के कमरे का माहौल शांत है

रात के समय कमरे का दृश्य बहुत शांत और सुकून भरा है। खिड़की से चांदनी आ रही है और लड़की बिस्तर पर बैठी है। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज में ऐसे शांत पल एक्शन के बाद राहत देते हैं। कमरे की सजावट से लगता है कि लड़की की पसंद बहुत आधुनिक है। पोस्टर और सामान से कमरा भरा हुआ है जो असली लगता है और जीवन जैसा है। यह वातावरण दर्शकों को अपना बना लेता है।

जादुई ऊर्जा का प्रवाह देखने में अच्छा लगता है

जब बोतल खुलती है तो नीली ऊर्जा बाहर निकलती है। यह दृश्य बहुत जादुई और सुंदर लगता है। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज में विशेष प्रभावों का उपयोग बहुत अच्छे से किया गया है। कीड़े पर उस ऊर्जा का प्रभाव देखकर लगता है कि अब वह और भी शक्तिशाली हो जाएगा। रोशनी का खेल देखने में बहुत आकर्षक लग रहा था और मन मोह लेता है। विजुअल इफेक्ट्स बहुत प्रभावशाली हैं।

लड़की और कीड़े की दोस्ती अनोखी है

एक इंसान और कीड़े की दोस्ती देखना बहुत अनोखा अनुभव है। वे एक दूसरे की मदद करते हैं और साथ बढ़ते हैं। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज में यह बंधन कहानी का मुख्य आकर्षण है। लड़की कीड़े को अपने कंधे पर बैठाती है जो उनकी निकटता को दर्शाता है। यह रिश्ता बहुत प्यारा और दिल को छूने वाला लगता है और भावनात्मक है। यह दोस्ती सबक सिखाती है।

कहानी की रफ्तार बहुत संतुलित है

कहानी न तो बहुत तेज है और न ही बहुत धीमी। हर दृश्य में कुछ नया होता है जो दर्शकों को बांधे रखता है। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज में प्लॉट की गति बहुत संतुलित है। एरीना से लेकर डॉर्म रूम तक का सफर बहुत आसानी से दिखाया गया है। दर्शक आसानी से कहानी के प्रवाह के साथ बहते हैं और मजे लेते हैं। निर्देशन की प्रशंसा करनी चाहिए।