इस कार्टून में कीड़े के चेहरे के भाव बहुत कमाल के हैं। जब वह जानकारी स्क्रीन देखता है तो उसकी निराशा साफ दिखती है। सफेद बालों वाली लड़की की नींद टूटने का दृश्य बहुत प्यारा लगा। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज में ऐसे मोड़ देखकर हंसी नहीं रुक रही थी। काश यह जार से बाहर आ पाता।
लड़की जब उठती है तो उसे नहीं पता कि उसके बिस्तर के पास क्या रखा है। जार में बंद वह जीव उसे देखकर चौंक जाती है। कार्टून की रंगत बहुत सॉफ्ट और सुकून देने वाली है। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज की कहानी में यह सुबह का दृश्य बहुत महत्वपूर्ण लग रहा है। आगे क्या होगा जानने को मन कर रहा है।
वह कीड़ा सिर्फ एक कीड़ा नहीं लग रहा, बल्कि उसके पास अपनी शक्ति है। जादुई स्क्रीन पर उसकी जानकारी देखकर लगा कि यह कोई खेल की दुनिया है। लड़की के साथ इसका रिश्ता क्या है यह जानना जरूरी है। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज में तकनीक और जादू का मिश्रण अच्छा लगा।
बेचारा कीड़ा जार में बंद है पर फिर भी इतना भावुक है। उसकी आंखों में चमक और कभी उदासी देखकर तरस आता है। लड़की शायद उसे अपना पालतू समझ रही है। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज के इस भाग में भावनात्मक संबंध बहुत गहरा दिखाया गया है। मुझे यह जोड़ी पसंद आ रही है।
लड़की के बाल और उसकी नींद का तरीका बहुत शांत दिखा। जब वह जागती है तो उसकी आंखों में डर और हैरानी दोनों थी। कमरे का माहौल बहुत सुकून भरा है। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज में किरदारों की रूपरेखा बहुत यूनिक है। मुझे लगता है लड़की को कुछ खास शक्तियां मिलने वाली हैं जल्दी।
रोशनी का खेल और छायांकन बहुत बढ़िया है। जब कीड़ा बिजली की ऊर्जा में होता है तो पृष्ठभूमि नीली हो जाती है। यह दृश्य बहुत सुंदर है। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज की गुणवत्ता देखकर लगता है कि इस पर बहुत मेहनत हुई है। हर फ्रेम में बारीकियां हैं जो ध्यान खींचती हैं।
वह कीड़ा तितली और मच्छर के बारे में सोच रहा था। शायद वह भी उड़ना चाहता है या अपने रूप को बदलना चाहता है। उसकी चाहतें इंसानों जैसी हैं। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज में यह दर्शाता है कि जानवर भी सपने देखते हैं। यह सीन दिल को छू गया सच में।
कमरे में चित्र, पौधे और खिड़की से आती धूप बहुत असली लगती है। ऐसा लगता है कि यह किसी की असली जिंदगी है। लड़की के अंगड़ाई लेने का अंदाज बहुत स्वाभाविक था। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज में ऐसे रोजमर्रा के दृश्य कहानी को जमीन से जोड़ते हैं। मुझे यह सादगी पसंद है।
जब लड़की ने जार को हाथ में लिया तो उसका चेहरा देखने लायक था। कीड़ा भी मस्त होकर हंस रहा था। यह हास्य समय बिल्कुल सही है। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज में हंसी और रहस्य का संतुलन बहुत अच्छा बनाया गया है। अगली कड़ी कब आएगी इसका इंतजार है।
यह कहानी एक नई शुरुआत की तरह लगती है। कीड़ा और लड़की की मुलाकात से कुछ बड़ा होने वाला है। रोमांच की झलक मिल रही है। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज का यह पहला प्रभाव बहुत सकारात्मक है। मैं आगे की कहानी जरूर देखना चाहूंगा। सबको देखना चाहिए।