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वह सब हार गई

सुमित्रा वर्मा को नहीं पता था कि उनके बेटे की मंगेतर उनकी ही संपत्ति के लिए जाल बुन रही है। गाँव से लौटते ही उन्होंने बेटी गीता के लिए शहर का रास्ता पकड़ा। सामने थी बेटे की शादी, और दिल में थी बहू के लिए करोड़ों के उपहार चुनने की खुशी। लेकिन जिस दुकान में वह भावी बहू के लिए गहने देखने जा रही थीं, वहाँ लीला अपने भाई के साथ उसी वक्त उनके ही भरोसे का गला घोंटने की ताक में बैठी थी।
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इस एपिसोड की समीक्षा

अस्पताल का वो डरावना पल

जब उसने ऑक्सीजन मास्क हटाया, तो मेरी सांसें रुक गईं। वह सब हार गई में यह सीन दिल दहला देने वाला है। बेटे की आंखों में डर और मां की कमजोरी ने मुझे रुला दिया। नेटशॉर्ट पर ऐसे इमोशनल मोमेंट्स देखना मेरी आदत बन गई है।

मां और बेटे का अनकहा दर्द

बिस्तर पर लेटी मां और उसके पास बैठा बेटा... दोनों के बीच की खामोशी चीख रही थी। वह सब हार गई की कहानी में यह रिश्ता सबसे गहरा लगा। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे ड्रामे देखकर लगता है कि जिंदगी भी कितनी अनिश्चित है।

फ्लैशबैक ने बदल दी कहानी

अचानक पार्टी का सीन आया और सब कुछ बदल गया। वह सब हार गई में यह ट्विस्ट बहुत स्मार्ट था। लाल ड्रेस वाली औरत और चमकता हुआ लड़का... शायद यही वजह है मां की बीमारी की। नेटशॉर्ट पर ऐसे सस्पेंस देखना मजा देता है।

आंखों में छिपा सच

मां की आंखें खुलीं तो उनमें सिर्फ डर नहीं, एक राज भी था। वह सब हार गई में हर फ्रेम में कुछ न कुछ छिपा है। बेटे का चेहरा देखकर लगता है कि उसे सब पता चल गया है। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे लेयरड स्टोरीटेलिंग देखना बेहतरीन अनुभव है।

पार्टी बनाम अस्पताल

एक तरफ शोर-शराबा, दूसरी तरफ मौत की खामोशी। वह सब हार गई ने इस कंट्रास्ट को बहुत खूबसूरती से दिखाया। मां की कमजोरी और बेटे की बेचैनी ने मुझे झकझोर दिया। नेटशॉर्ट पर ऐसे विजुअल स्टोरीटेलिंग देखना दुर्लभ है।

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