वह सब हार गई के इस सीन में हरी साड़ी पहनी लड़की की आंखों में जो डर और बेचैनी है, वो दिल को छू लेती है। उसकी हर हरकत में एक टूटा हुआ दिल झलकता है, जैसे वो किसी बड़े धोखे का सामना कर रही हो। उसकी साड़ी की चमक उसके आंसुओं के सामने फीकी पड़ जाती है।
भूरे सूट वाले शख्स की खामोशी सबसे ज्यादा शोर मचा रही है। वह सब हार गई के इस मोड़ पर उसका चेहरा पत्थर जैसा है, लेकिन आंखों में एक तूफान छिपा है। वो न तो चिल्ला रहा है न रो रहा है, बस खड़ा है, जैसे दुनिया का सारा बोझ उसके कंधों पर हो।
सफेद पोशाक वाली महिला का व्यवहार बर्फ जैसा ठंडा है। वह सब हार गई के इस ड्रामे में वो किसी न्यायाधीश की तरह खड़ी है, बिना किसी भाव के। उसकी आंखों में न तो दया है न गुस्सा, बस एक अजीब सी उदासी है, जैसे वो सब कुछ देख चुकी हो और अब कुछ भी उसे हिला न सके।
जब हरी साड़ी वाली लड़की जमीन पर गिरती है, तो लगता है जैसे उसका अहंकार भी टूट गया हो। वह सब हार गई के इस सीन में उसकी चीखें सिर्फ आवाज नहीं, बल्कि एक टूटे हुए वादे की गूंज हैं। उसका गिरना सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि भावनात्मक भी है।
थप्पड़ की आवाज के बाद जो खामोशी छा जाती है, वो सबसे ज्यादा डरावनी है। वह सब हार गई के इस पल में सबकी सांसें रुक सी गई हैं। हरी साड़ी वाली लड़की का चेहरा लाल हो गया है, लेकिन उसकी आंखों में अब डर नहीं, बल्कि एक अजीब सी जिद्द दिखाई दे रही है।