जब वह सब हार गई का प्लॉट अस्पताल के कॉरिडोर में शुरू होता है, तो माहौल में एक अजीब सी तनावपूर्ण शांति है। बैंगनी कुर्ती वाली महिला और चमड़े के जैकेट वाला युवक जैसे ही सूट वाले शख्स से मिलते हैं, हवा में बिजली कौंध जाती है। उनकी आंखों में छिपी कहानी और अनकही बातें दर्शक को बांधे रखती हैं। यह दृश्य सिर्फ एक मुलाकात नहीं, बल्कि एक तूफान की शुरुआत लगती है।
ग्रे सूट पहने उस शख्स की एंट्री ने सबका ध्यान खींच लिया। उसकी आंखों में एक गहरा दर्द और जिम्मेदारी का बोझ साफ झलक रहा था। जब वह उस कमरे में जाता है जहां मरीज लेटी है, तो लगता है जैसे वह सब हार गई की कहानी का असली मोड़ वहीं से शुरू हो रहा हो। उसका हर इशारा और चेहरे के भाव बता रहे हैं कि वह किसी बड़े संकट से जूझ रहा है।
नीली-सफेद धारीदार पायजामे में लेटी वह लड़की बेहद कमजोर लग रही थी। उसकी आंखों में आंसू और चेहरे पर मासूमियत थी जो किसी भी दर्शक का दिल पिघला दे। जब सूट वाला शख्स उससे बात करता है, तो लगता है जैसे वह सब हार गई की कहानी में यह पात्र सबसे ज्यादा दर्द झेल रहा है। उसकी खामोशी भी चीख रही थी।
उसी कमरे में मौजूद बूढ़ी महिला, जो शायद मां है, का चेहरा चिंता से भरा हुआ था। उसकी आंखों में बेचैनी और लाचारी साफ दिख रही थी। जब वह सूट वाले शख्स से बात करती है, तो लगता है जैसे वह सब हार गई की कहानी में वह परिवार की रीढ़ है। उसका हर शब्द और भावना दर्शक को उस स्थिति से जोड़ देती है।
अचानक स्क्रीन पर एक गर्म रंगों वाला फ्लैशबैक आता है जहां बैंगनी कुर्ती वाली महिला गुस्से में चिल्ला रही है। यह दृश्य वह सब हार गई की कहानी में एक बड़ा ट्विस्ट लेकर आता है। लगता है कि अतीत में कुछ ऐसा हुआ था जिसने वर्तमान की यह स्थिति पैदा की। उस महिला का गुस्सा और युवक का हैरान चेहरा सब कुछ बता रहा था।