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वह सब हार गई

सुमित्रा वर्मा को नहीं पता था कि उनके बेटे की मंगेतर उनकी ही संपत्ति के लिए जाल बुन रही है। गाँव से लौटते ही उन्होंने बेटी गीता के लिए शहर का रास्ता पकड़ा। सामने थी बेटे की शादी, और दिल में थी बहू के लिए करोड़ों के उपहार चुनने की खुशी। लेकिन जिस दुकान में वह भावी बहू के लिए गहने देखने जा रही थीं, वहाँ लीला अपने भाई के साथ उसी वक्त उनके ही भरोसे का गला घोंटने की ताक में बैठी थी।
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इस एपिसोड की समीक्षा

बुजुर्ग महिला का दबदबा

इस दृश्य में बुजुर्ग महिला का आत्मविश्वास और ठहराव देखने लायक है। वह हरे रंग की पोशाक वाली लड़की के गिरने और चिल्लाने के बावजूद बिल्कुल नहीं घबराती। उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक है जो बताती है कि वह सब हार गई कहानी का असली खिलाड़ी वही है। उसकी साड़ी और गहने उसकी हैसियत को बयां कर रहे हैं।

हरा लिबास और गिरावट

हरे रंग की मखमली पोशाक पहनी लड़की का जमीन पर गिरना और फिर गुस्से में उठकर इशारा करना बहुत नाटकीय था। उसका चेहरा गुस्से और हताशा से भरा हुआ था। लगता है वह सब हार गई की कहानी में वह किसी बड़ी साजिश का शिकार हुई है। उसकी आँखों में आंसू और आवाज में दर्द साफ झलक रहा था।

भूरे सूट वाला शख्स

भूरे रंग के दोहरी बटन वाले सूट में वह शख्स बहुत गंभीर लग रहा था। उसकी आँखों में हैरानी और फिर गुस्सा साफ दिखाई दिया। जब हरे लिबास वाली लड़की चिल्ला रही थी, तो वह बस खड़ा होकर देख रहा था। वह सब हार गई के कथानक में उसकी भूमिका बहुत महत्वपूर्ण लग रही है, शायद वह किसी फैसले के कगार पर है।

सुरक्षा कर्मियों का आगमन

जैसे ही हरे लिबास वाली लड़की ने शोर मचाना शुरू किया, काले चश्मे वाले सुरक्षा कर्मियों ने प्रवेश किया। उस लड़की को पकड़ना और दूसरे शख्स को घसीटना बहुत तेजी से हुआ। यह सब हार गई के चरमोत्कर्ष का संकेत देता है। कक्ष का माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया और अतिथि हैरान रह गए।

जन्मदिन के उत्सव में हंगामा

पीछे की स्क्रीन पर 'जन्मदिन की बधाई' लिखा था, लेकिन माहौल बिल्कुल भी उत्सव जैसा नहीं था। हरे लिबास वाली लड़की का रोना-पीटना और बुजुर्ग महिला का शांत रहना एक अजीब विरोधाभास था। वह सब हार गई की यह कहानी बताती है कि कैसे एक खुशी का मौका दुश्मनी का मैदान बन सकता है।

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