इस दृश्य में एक बूढ़ी माँ अपनी बेटी की जान बचाने के लिए कितनी गिड़गिड़ा रही है, यह देखकर दिल दहल जाता है। वह सब हार गई की कहानी में यह पल सबसे ज्यादा इमोशनल है। उस औरत की आँखों में बेबसी और गुस्सा दोनों साफ दिख रहे हैं जब वह दवाई मांग रही है।
बैंगनी कुर्ती वाली औरत का व्यवहार सच में नफरत करने लायक है। वह दवाई की शीशी को ऐसे पकड़े हुए है जैसे कोई खिलौना हो, जबकि सामने कोई तड़प रहा है। वह सब हार गई में इस विलेन का किरदार इतना घृणित है कि स्क्रीन तोड़ने का मन करता है। उसकी मुस्कान में जो क्रूरता है, वह रोंगटे खड़े कर देती है।
काले जैकेट वाला लड़का जिस तरह से बेचारी लड़की का गला दबा रहा है, वह देखकर गुस्सा आता है। वह सब हार गई के इस सीन में हिंसा की हद पार हो गई है। उसकी आँखों में पागलपन साफ झलक रहा है जब वह माँ को धमका रहा है। ऐसे किरदारों को सजा मिलनी ही चाहिए।
जब वह बूढ़ी माँ अपनी बेटी को गोद में लेकर रो रही थी, तो मेरी आँखें भी नम हो गईं। वह सब हार गई में यह दृश्य दिखाता है कि एक माँ अपने बच्चे के लिए क्या कुछ कर सकती है। उसकी चीखें और गिड़गिड़ाहट किसी भी पत्थर दिल को पिघला सकती है। यह एक्टिंग सच में लाजवाब है।
पीछे खड़े लोग बस तमाशबीन बने हुए हैं, कोई आगे बढ़कर मदद नहीं कर रहा। वह सब हार गई की इस कहानी में समाज की इस उदासीनता को बहुत अच्छे से दिखाया गया है। सब चुपचाप खड़े होकर देख रहे हैं जबकि एक जान जाने के कगार पर है। यह यथार्थवादी दृश्य बहुत प्रभावशाली है।