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Badla Swayamvar

Sanjana aur Shalu do behan hain. Pehli zindagi mein Sanjana ne Karan Sinha ko chuna aur woh Rajlakshmi ban gayi. Shalu ka jeevan barbaad ho gaya. Shalu ne jalan mein Sanjana ko maar diya. Phir dono Punarjanam le kar Swayamvar ke din wapas aati hain. Is baar Shalu pehle Karan ko chun leti hai aur Sanjana ko bheekh maangne wale ke paas bhej deti hai. Lekin woh bheekh maangne wala chhupa hua samraat hai jo Sanjana se prem karne lagta hai. Kya Sanjana sukh paayegi? Kya Shalu jalan ki sazaa bhogegi?
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इस एपिसोड की समीक्षा

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कहानी का मोड़

अब कहानी में बड़ा बदलाव आएगा। इस गिरने के बाद सब कुछ बदल जाएगा। बदला स्वयंवर के आगे के कड़ी का इंतजार है। उस युवक और युवती के बीच कुछ तो बात है। बाकी युवतियां जल रही थीं। यह ईर्ष्या और प्यार की कहानी है। दर्शक इस जोड़ी को साथ देखना चाहते हैं। यह दृश्य बहुत ही भावुक है। सबका दिल जीत लिया। यह अंत नहीं है।

रात का सन्नाटा

पूरा आंगन सन्नाटे में डूबा हुआ था बस उनकी आवाजें आ रही थीं। मशाल की रोशनी से परछाइयां बन रही थीं। बदला स्वयंवर का यह सीन बहुत खूबसूरत है। जब वह युवक आया तो सन्नाटा और गहरा गया। सबको लगा अब बड़ा हंगामा होगा। पर उसने बस उसे संभाला। यह चुप्पी शोर से ज्यादा असरदार थी। माहौल गंभीर था। सब देख रहे थे। यह पल खास है।

धक्का और गिरावट

धक्का इतना जोर से था कि वह संभल नहीं पाई। जमीन सख्त थी इसलिए चोट लगना तय था। बदला स्वयंवर की कहानी में यह मोड़ नया है। नीले वस्त्र वाली युवती को बाद में पछतावा होगा। पर अभी तो वह गुस्से में दिख रही थी। गिरने वाली की चीख से सबकी नींद खुल गई होगी। यह दृश्य हिंसक लग सकता है पर जरूरी है। कहानी में उथल पुथल है। सब हैरान थे।

अधिकारी की एंट्री

लाल टोपी वाले अधिकारी का आगमन बहुत नाटकीय था। उसके हाथ में झाड़ू जैसा कुछ था। उसने सबको चुप रहने का इशारा किया। बदला स्वयंवर में इस किरदार की अहमियत बढ़ गई है। वह युवक अभी भी उस युवती को पकड़े हुए था। सबकी नजरें उन दोनों पर टिकी थीं। रात के सन्नाटे में बस उनकी सांसें सुनाई दे रही थीं। यह दृश्य बहुत तनावपूर्ण है। सब रुके हुए थे। कोई नहीं बोला।

रात का कोलाहल

रात के अंधेरे में आंगन की लड़ाई बहुत गंभीर लग रही थी। हरे वस्त्रों वाली नायिका गुस्से से कांप रही थी। नीले लिबास वाली ने जब उसे धक्का दिया तो सब चौंक गए। बदला स्वयंवर के इस कड़ी में तनाव चरम पर था। गिरने वाली युवती की आवाज में दर्द साफ सुनाई दिया। वहां खड़ी तीसरी सेविका कुछ बोल नहीं पाई। मशालों की रोशनी में चेहरे के भाव साफ दिख रहे थे। यह दृश्य बहुत ही नाटकीय अंदाज में फिल्माया गया है। दर्शक इससे जुड़ाव महसूस करेंगे। नेटशॉर्ट ऐप पर यह देखना मजेदार है।

गिरने का नाटक

क्या वह सच में गिरी थी या यह कोई चाल थी। नीले पोशाक वाले रक्षक ने तुरंत उसे संभाल लिया। दोनों की नजरें मिलते ही समय थम सा गया। बदला स्वयंवर की कहानी में यह पल बहुत महत्वपूर्ण है। पीछे खड़ी अन्य युवतियां हैरान रह गईं। लाल टोपी वाले अधिकारी का आगमन भी सही समय पर हुआ। जमीन पर पड़ी युवती की आंखों में आंसू थे। यह रोमांस और नाटक का बेहतरीन मिश्रण है। कोई भी इसे देखकर उदास नहीं होगा। सबकी सांसें रुक गई थीं।

वफादार रक्षक

जब वह जमीन पर गिरी तो सबने सोचा कोई नहीं आएगा। पर नीले कपड़े वाला युवक बिजली की रफ्तार से दौड़ा। उसने बड़ी सावधानी से उसे उठाया। बदला स्वयंवर में ऐसे सीन दिल को छू लेते हैं। उसकी आंखों में चिंता साफ झलक रही थी। गिरने वाली नायिका भी उसे ही देख रही थी। आंगन की ठंडी हवा में गर्माहट आ गई। यह दृश्य दर्शकों को बहुत पसंद आएगा। सबकी धड़कनें तेज हो गईं। यह पल अमिट है।

साजिश की बू

तीन युवतियों के बीच की दुश्मनी साफ दिख रही थी। एक को अकेला पाकर दूसरों ने घेर लिया। बदला स्वयंवर की पटकथा में यह षड्यंत्र रोचक है। धक्का देने वाली की हंसी देखकर गुस्सा आता है। पर जब वह युवक आया तो सब चुप हो गए। लाल टोपी वाले ने भी गंभीरता दिखाई। रात का माहौल और भी रहस्यमयी बन गया। हर किरदार का अभिनय लाजवाब है। यह कहानी आगे बढ़ेगी। सब देख रहे थे।

पोशाकों का जलवा

इस सीन में किरदारों के कपड़े बहुत सुंदर हैं। हरे और नीले रंग की साड़ियां चमक रही थीं। बदला स्वयंवर के मंच सजावट पर बहुत मेहनत की गई है। रात के दृश्य में रोशनी बहुत अच्छी है। जब युवक दौड़कर आया तो उसका नीला लिबास हवा में लहराया। गिरने वाली युवती के गहने भी बहुत भारी लग रहे थे। यह दृश्य देखने में बहुत आकर्षक है। कलाकारों की मेहनत दिखती है। नेटशॉर्ट ऐप की गुणवत्ता अच्छी है। सबको पसंद आएगा।

आंखों की बात

जब उसने उसे उठाया तो दोनों की आंखें मिलीं। बिना कुछ बोले सब कह गया। बदला स्वयंवर में यह रोमांटिक पल यादगार है। गिरने वाली युवती की सांसें तेज हो गई थीं। उसे संभालने वाले के हाथ कांप रहे थे। पीछे खड़ी युवतियां यह सब देखती रह गईं। यह पल किसी सपने जैसा लग रहा था। संगीत भी इस मौके पर बहुत धीमा था। यह जादू था। कोई नहीं हिला।

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