PreviousLater
Close

Badla Swayamvar

Sanjana aur Shalu do behan hain. Pehli zindagi mein Sanjana ne Karan Sinha ko chuna aur woh Rajlakshmi ban gayi. Shalu ka jeevan barbaad ho gaya. Shalu ne jalan mein Sanjana ko maar diya. Phir dono Punarjanam le kar Swayamvar ke din wapas aati hain. Is baar Shalu pehle Karan ko chun leti hai aur Sanjana ko bheekh maangne wale ke paas bhej deti hai. Lekin woh bheekh maangne wala chhupa hua samraat hai jo Sanjana se prem karne lagta hai. Kya Sanjana sukh paayegi? Kya Shalu jalan ki sazaa bhogegi?
  • Instagram
सुझाव

इस एपिसोड की समीक्षा

नवीनतम

कुल मिलाकर

कुल मिलाकर यह कड़ी बहुत रोमांचक थी। प्यार, संदेह और खतरा सब कुछ है। बदला स्वयंवर ने दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। अगली कड़ी का इंतजार नहीं हो रहा है। यह कहानी कहां जाएगी, यह देखना दिलचस्प होगा। सबको यह जरूर देखना चाहिए। बहुत अच्छी कहानी है।

बेहतरीन सेटिंग

गांव का माहौल और पुराने घर की सजावट बहुत असली लगती है। बदला स्वयंवर ने दृश्यों पर बहुत ध्यान दिया है। धूल मिट्टी और सादगी कहानी का हिस्सा बन गई है। यह हमें एक अलग समय में ले जाती है। कलाकारों की मेहनत साफ झलकती है। यह एक बेहतरीन प्रस्तुति है। सबको देखना चाहिए।

रिश्तों की गहराई

दोनों के बीच की नोकझोक बहुत प्यारी है। वह उसे डांटता है लेकिन प्यार से। बदला स्वयंवर में रिश्तों की यह गहराई देखने लायक है। जब वह लकड़ी काटती है तो वह चिंतित होता है। यह दिखाता है कि वह उसकी परवाह करता है। ऐसे रिश्ते आजकल कम देखने को मिलते हैं। यह दिल को छू लेता है।

खतरे की घंटी

अंत में जब सशस्त्र लोग आते हैं, तो सांस रुक जाती है। लगता है कोई पुराना दुश्मन या राज सामने आने वाला है। बदला स्वयंवर का अंत बहुत दमदार है। महिला का चेहरा देखकर लगता है वह उन्हें जानती है। अब आगे क्या होगा, यह जानने की उत्सुकता बढ़ गई है। सब इंतजार कर रहे हैं।

प्यार की शुरुआत

शुरुआत ही से यह कहानी दिल को छू लेती है। जब वह अपनी दुल्हन को गोद में उठाकर घर ले जाता है, तो लगता है जैसे प्यार की जीत हुई हो। गरीब घर और अमीर कपड़ों का अंतर बहुत गहरा है। बदला स्वयंवर में ऐसे सीन देखकर मन भर आता है। लगता है आगे बहुत कुछ होने वाला है। यह जोड़ी सच में बहुत प्यारी लग रही है। उनके बीच का लगाव देखते ही बनता है। हर पल में एक नया मोड़ आता है। दर्शक भी इसमें खो जाते हैं।

मजबूत किरदार

दुल्हन का किरदार बहुत मजबूत दिखाया गया है। वह सिर्फ सजावट नहीं है, बल्कि लकड़ी काटती है और सफाई करती है। यह देखकर अच्छा लगा कि वह मेहनती है। बदला स्वयंवर की कहानी में ऐसा किरदार बहुत जरूरी था। पति का हैरान होना स्वाभाविक है। उसने कभी नहीं सोचा होगा कि उसकी पत्नी इतनी सक्षम होगी। यह बदलाव बहुत रोचक है। सबको यह पसंद आएगा।

भावुक पल

जब वह उसे वह पुराना जेड पेंडेंट देता है, तो आंखों में आंसू आ जाते हैं। यह सिर्फ एक उपहार नहीं, बल्कि भावनाओं का प्रतीक है। बदला स्वयंवर में ऐसे छोटे विवरण बहुत मायने रखते हैं। महिला का उसे स्वीकार करना दिखाता है कि वह उसे समझती है। यह पल बहुत ही भावुक था। मुझे यह सीन सबसे ज्यादा पसंद आया। यह यादगार बन गया।

रोमांटिक रात

शादी की रात का माहौल बहुत प्रेमपूर्ण था। मोमबत्तियों की रोशनी में उनका प्यार साफ दिख रहा था। बदला स्वयंवर ने इस सीन को बहुत खूबसूरती से दिखाया है। जब वे एक दूसरे के करीब आते हैं, तो स्क्रीन पर जादू चलता है। यह सिर्फ शारीरिक नहीं, आत्मिक मिलन लग रहा था। दर्शक भी इसमें खो जाते हैं। बहुत सुंदर दृश्य था।

सुबह का रहस्य

सुबह जब वह अकेले जागता है, तो उसके चेहरे पर भ्रम साफ था। वह सोच रहा होगा कि वह कहां गई। बदला स्वयंवर में यह रहस्य बहुत अच्छा बनाया गया है। फिर जब वह सादे कपड़ों में वापस आती है, तो लगता है कहानी में कोई बड़ा मोड़ है। यह अनिश्चितता दर्शकों को बांधे रखती है। आगे क्या होगा देखना है।

सादगी की खूबसूरती

उसका सादे कपड़ों में आना और खाना परोसना दिखाता है कि वह रानी नहीं, एक साधारण पत्नी बनना चाहती है। बदला स्वयंवर की यह खूबी है कि वह पात्रों को बहुआयामी बनाती है। पति का हैरान होना लाजमी है। वह उसे नए रूप में देख रहा है। यह परिवर्तन कहानी को आगे बढ़ाता है। यह बहुत अच्छा लगा।

और भी शानदार समीक्षाएँ (10)
arrow down