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Badla Swayamvar

Sanjana aur Shalu do behan hain. Pehli zindagi mein Sanjana ne Karan Sinha ko chuna aur woh Rajlakshmi ban gayi. Shalu ka jeevan barbaad ho gaya. Shalu ne jalan mein Sanjana ko maar diya. Phir dono Punarjanam le kar Swayamvar ke din wapas aati hain. Is baar Shalu pehle Karan ko chun leti hai aur Sanjana ko bheekh maangne wale ke paas bhej deti hai. Lekin woh bheekh maangne wala chhupa hua samraat hai jo Sanjana se prem karne lagta hai. Kya Sanjana sukh paayegi? Kya Shalu jalan ki sazaa bhogegi?
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इस एपिसोड की समीक्षा

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अंत का सस्पेंस

आखिरी दृश्य में उस व्यक्ति की नजरें और दुल्हन का चेहरा एक दूसरे को देख रहे हैं। बदला स्वयंवर में यह चरमोत्कर्ष बहुत दमदार है। प्यार और बदले की कहानी आगे कैसे बढ़ती है यह देखना दिलचस्प होगा। कुल मिलाकर एक बेहतरीन प्रस्तुति।

हवेली की भव्यता

शर्मा हवेली का आंगन और वहां की सजावट देखकर लगता है जैसे इतिहास में जी रहे हों। बदला स्वयंवर का मंच बहुत भव्य है। अंत में आए व्यक्ति की प्रवेश ने रहस्य बढ़ा दिया है। अब तो अगला भाग देखने की जल्दी है।

प्रेम और रहस्य

जब दूल्हा नीचे उतरा तो उसकी नजरें सीधे दुल्हनों पर थीं। बदला स्वयंवर में प्रेम के साथ रहस्य भी है। पुराने जमाने की पोशाकें पहनकर अभिनेताओं ने जान डाल दी है। यह दृश्य यादगार बन गया है। संगीत भी बहुत सुरीला लगा।

कला की बारीकी

दोनों दुल्हनों के सिर के गहने और कपड़ों की कढ़ाई बहुत बारीक है। बदला स्वयंवर की निर्माण गुणवत्ता प्रशंसनीय है। एक दुल्हन मुस्कुरा रही है तो दूसरी चिंतित है, यह अंतर कहानी की कुंजी है। नेटशॉर्ट पर ऐसी सामग्री मिलना सुखद है।

दो दुल्हनों का रहस्य

दोनों दुल्हनें लाल पोशाक में बेहद खूबसूरत लग रही हैं, लेकिन उनकी आंखों में छिरा तनाव सब कुछ बता रहा है। क्या यह सच्चा प्यार है या कोई साजिश? बदला स्वयंवर की कहानी में यह मोड़ बहुत ही रोचक लग रहा है। आभूषण और सजावट ने तो दिल जीत लिया। नेटशॉर्ट ऐप पर देखने का अनुभव काफी अच्छा रहा है।

सफेद घोड़े वाला दूल्हा

सफेद घोड़े पर सवार दूल्हा जब आया तो माहौल में खुशी थी, पर दोनों दुल्हनों के बीच की चुप्पी शोर मचा रही थी। बदला स्वयंवर में ऐसे ड्रामा की उम्मीद नहीं थी। पुराने जमाने की हवेली और रस्में देखकर अच्छा लगा। आगे क्या होगा यह जानने के लिए मैं बेताब हूं।

अतीत का साया

अंत में जो व्यक्ति आया उसकी आंखों में गुस्सा और दर्द दोनों साफ दिख रहे थे। क्या वह अतीत से जुड़ा है? बदला स्वयंवर का यह किरदार कहानी को नया मोड़ देगा। वेशभूषा और मंच सजावट बहुत शानदार हैं। ऐसे सीन बार बार देखने को मन करता है।

दौलत का दिखावा

दहेज के संदूक और सोने के गहने देखकर हैरानी हुई, इतनी दौलत किसी की भी हो सकती है। बदला स्वयंवर में दिखाया गया वैभव लाजवाब है। दोनों बहनों के बीच की प्रतिस्पर्धा साफ झलक रही है। कहानी में गहराई है जो दर्शकों को बांधे रखती है।

माता पिता की चिंता

माता पिता के चेहरे पर खुशी थी पर दुल्हनों के चेहरे पर नहीं। यह विरोधाभास बहुत गहरा है। बदला स्वयंवर में भावनात्मक पल बहुत अच्छे से पकड़े गए हैं। पारंपरिक वाद्ययंत्र और शोरगुल ने शादी का माहौल बना दिया। मुझे यह शैली बहुत पसंद आ रही है।

शहर की गवाही

भीड़ की प्रतिक्रियाएं देखकर लगता है कि पूरा शहर इस शादी पर नजर गड़ाए हुए है। बदला स्वयंवर में सामाजिक दबाव को अच्छे से दिखाया गया है। लाल लालटेन और सजावट ने दृश्य को जीवंत बना दिया। हर छवि एक तस्वीर की तरह सुंदर है।

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