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Badla Swayamvar

Sanjana aur Shalu do behan hain. Pehli zindagi mein Sanjana ne Karan Sinha ko chuna aur woh Rajlakshmi ban gayi. Shalu ka jeevan barbaad ho gaya. Shalu ne jalan mein Sanjana ko maar diya. Phir dono Punarjanam le kar Swayamvar ke din wapas aati hain. Is baar Shalu pehle Karan ko chun leti hai aur Sanjana ko bheekh maangne wale ke paas bhej deti hai. Lekin woh bheekh maangne wala chhupa hua samraat hai jo Sanjana se prem karne lagta hai. Kya Sanjana sukh paayegi? Kya Shalu jalan ki sazaa bhogegi?
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इस एपिसोड की समीक्षा

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तूफान की पूर्वसूचना

अंत में जब सब एक दूसरे को घूर रहे थे तो लगा तूफान आने वाला है। बदला स्वयंवर का यह अंत बहुत ही जबरदस्त था। राजकुमार ने तलवार उठाकर सबको चौंका दिया। सादी पोशाक वाली महिला की आंखों में अब डर नहीं गुस्सा था। यह शो आपको भावनाओं के उतार-चढ़ाव से गुजरता है। मुझे इस ऐप पर यह सीरीज मिलना बहुत अच्छा लगा है।

स्वाभाविक अभिनय

अभिनय इतना स्वाभाविक है कि लगता नहीं कि यह नाटक है। बदला स्वयंवर के कलाकारों ने जान डाल दी है इस कहानी में। जब चाकू सामने आया तो सबकी सांसें थम सी गईं। रानी की चालाकी और लड़की की सीधापन आमने-सामने हैं। यह दृश्य बताता है कि प्यार और ताकत के बीच कितना फर्क होता है। पृष्ठभूमि इतनी शानदार है कि बार-बार देखने का मन करता है।

वफादारी का सवाल

इस कहानी में वफादारी और धोखे की लकीर बहुत पतली है। बदला स्वयंवर ने इतिहास को बहुत ही रोचक तरीके से पेश किया है। वह लड़की जो शुरू में शांत थी अब आग उगल रही है। रक्षक और राजकुमार के बीच की कशमकश देखने लायक है। पत्थर की जमीन और पुरानी इमारतें माहौल को गंभीर बनाती हैं। मुझे हर एपिसोड के बाद अगले का इंतजार बेचैनी से होता है।

महिलाओं का संघर्ष

जब रानी ने अपनी बांहें जोड़ लीं तो लगा कि अब कोई बड़ी कार्रवाई होने वाली है। बदला स्वयंवर में महिला पात्र बहुत मजबूत दिखाए गए हैं। चाकू निकलते ही माहौल में बिजली सी कौंध गई। राजकुमार की आंखों में एक अजीब सी बेचैनी साफ झलक रही थी। यह महल का माहौल बहुत दबाव वाला लगता है जहां हर सांस गिनी जाती है। कहानी की रफ्तार बहुत सही है न बहुत तेज न बहुत धीमी।

चाकू का खतरनाक खेल

इस दृश्य में तनाव इतना बढ़ गया कि सांस रुक सी गई। जब चाकू निकला तो सबकी आंखें फटी की फटी रह गईं। बदला स्वयंवर में ऐसे मोड़ बार-बार देखने को मिलते हैं। राजकुमार की आंखों में गुस्सा और चिंता दोनों साफ दिख रहे थे। वह महिला जो जमीन पर गिर गई, उसकी आंखों में आंसू नहीं आग थी। पोशाकें बहुत ही शानदार हैं और हर बारीकी का ध्यान रखा गया है। मुझे यह ऐप पर देखना बहुत पसंद आ रहा है क्योंकि कहानी कहीं भी बोरिंग नहीं होती। यह मुकाबला सिर्फ ताकत का नहीं दिलों का भी है।

रानी की खतरनाक मुस्कान

रानी की मुस्कान में एक अजीब सी खतरनाक चमक थी जो किसी को भी डरा सकती है। बदला स्वयंवर के इस एपिसोड में सत्ता का खेल बहुत गहरा दिखाया गया है। सादी पोशाक वाली लड़की की हिम्मत देखकर दांत तले उंगली दबानी पड़ती है। वह गिरने के बाद भी हारी नहीं लग रही थी। पृष्ठभूमि में बना प्राचीन भवन कहानी को असली अहसास देता है। संवाद कम हैं लेकिन अभिनय इतना तेज है कि सब कुछ समझ आ जाता है। मुझे लगता है आगे की कहानी और भी रोमांचक होने वाली है।

रक्षक से राजकुमार तक

शुरुआत में जो रक्षक दिखा वह बहुत कोमल लग रहा था लेकिन बाद में राजकुमार का प्रवेश धमाकेदार हुआ। बदला स्वयंवर में पात्रों के बीच का रसायन बहुत गजब का है। जब वह लड़की जमीन पर गिरती है तो दर्शक के रूप में हम भी दर्द महसूस करते हैं। रानी के गहने और कपड़े इतिहास के बहुत करीब लगते हैं। यह दृश्य बताता है कि महल की दीवारों के पीछे कितने राज छिपे होते हैं। हर पल एक नया रहस्य बना रहता है जो दर्शकों को बांधे रखता है।

खामोशी की चीख

चाकू की नोक पर जब बातचीत हो रही थी तो खामोशी चीख रही थी। बदला स्वयंवर की कहानी में हर मोड़ पर एक नया झटका लगता है। राजकुमार ने अपनी तलवार किसके लिए निकाली यह अभी साफ नहीं हुआ है। सादी कपड़ों वाली महिला की जिद और रानी का घमंड आमने-सामने हैं। मंच सजावट इतनी असली लगती है कि आप उसी दौर में पहुंच जाएं। मुझे इस शो की वजह से बहुत समय बिताना पड़ रहा है क्योंकि रुक नहीं पाता।

रंगों का गहरा खेल

इस सीन में रंगों का खेल बहुत खूबसूरत तरीके से किया गया है। भूरे रंग के कपड़े और सादी पोशाक के बीच का अंतर बहुत गहरा है। बदला स्वयंवर में दृश्य कथा बहुत मजबूत है। जब वह लड़की गुस्से में ऊपर देखती है तो लगता है वह बदला लेगी। रानी के सिर का ताज बहुत भारी लग रहा है लेकिन उसने उसे अच्छे से संभाला है। यह सिर्फ एक झगड़ा नहीं बड़े षड्यंत्र की शुरुआत लगती है।

धोखे की पतली लकीर

भावनाओं का यह खेल देखकर लगता है कि हर कोई किसी न किसी से धोखा खा रहा है। बदला स्वयंवर में रिश्तों की डोर बहुत उलझी हुई है। राजकुमार का चेहरा पढ़ना मुश्किल हो रहा है कि वह किसका साथ दे रहा है। जमीन पर गिरने वाला दृश्य बहुत दर्दनाक था लेकिन उसने हार नहीं मानी। पुराने जमाने के कपड़ों की सिलाई और कढ़ाई बहुत बारीक है। मुझे यह लगता है कि यह शो अपने जैसा नहीं है।

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