ऑफिस के माहौल में अचानक जो रोमांस देखने को मिला वो काफी चौंकाने वाला था। लैपटॉप पर काम करते वक्त जब वो पास आए तो माहौल में तनाव साफ झलक रहा था। परफेक्ट हसबैंड का जाल में ऐसे दृश्य देखकर लगता है कि कहानी में बहुत गहराई है। महिला के चेहरे पर डर और आकर्षण दोनों साफ दिख रहे थे। ये जो लगाव है ना, बस देखती ही बन रही है। हर पल कुछ नया हो रहा है और दर्शक बस देखते रह जाते हैं।
शयनकक्ष वाले दृश्य में जो नज़ारा था वो दिल को छू गया। पति का व्यवहार थोड़ा सख्त था लेकिन उसमें एक अलग ही देखभाल भी छिपी थी। जब उसने उसे बिस्तर पर लिटाया तो नज़ारे बदल गए। परफेक्ट हसबैंड का जाल की ये कहानी बताती है कि रिश्ते कितने जटिल हो सकते हैं। आंखों ही आंखों में जो बातें हो रही थीं वो शब्दों से कहीं ज्यादा असरदार थीं। मुझे ये नाटक बहुत पसंद आ रहा है और मैं आगे क्या होता है ये जानने के लिए बेताब हूं।
अभिनेत्री की आंखों में जो डर और उम्मीद दोनों थे वो कमाल के थे। जब वो उसे देख रही थी तो लग रहा था कि वो कुछ कहना चाहती है लेकिन कह नहीं पा रही है। परफेक्ट हसबैंड का जाल में ऐसे भावनात्मक पल बहुत हैं जो दर्शकों को बांधे रखते हैं। पति का गुस्सा और फिर प्यार, ये सब कुछ बहुत तेजी से बदल रहा था। मुझे लगता है कि आगे की कहानी में और भी बड़े खुलासे होने वाले हैं जो सबको हैरान कर देंगे।
सफेद सूट और शर्ट का संयोजन बहुत ही शाही लग रहा था। कार्यालय हो या शयनकक्ष, हर जगह इनके वस्त्र दृश्य के हिसाब से उत्तम थे। परफेक्ट हसबैंड का जाल में दृश्यों पर काफी ध्यान दिया गया है जो इसे और भी खूबसूरत बनाता है। गहने भी बहुत सूट कर रहे थे खासकर झुमके जो हर पहलू से चमक रहे थे। ऐसे निर्माण मूल्य वाले कार्यक्रम देखकर अच्छा लगता है कि मेहनत की गई है।
शुरुआत में लगा कि ये बस एक आम रोमांस है लेकिन जैसे जैसे आगे बढ़ा वैसे ही पता चला कि इसमें कुछ और ही बात है। परफेक्ट हसबैंड का जाल की कथा बहुत ही मज़ेदार तरीके से आगे बढ़ रही है। जब वो गुस्से में चला गया तो लगा कि शायद कुछ गड़बड़ है। हर कड़ी के बाद रहस्य बढ़ता जा रहा है और दर्शकों को अगली कड़ी का इंतज़ार रहता है। ये कार्यक्रम बिल्कुल निराश नहीं करता।
दोनों कलाकारों ने अपने पात्रों को बहुत ही खूबसूरती से निभाया है। जब वो चिल्ला रही थी तो असली गुस्सा महसूस हो रहा था। परफेक्ट हसबैंड का जाल में ऐसे दृश्य हैं जो आपको हिला कर रख देंगे। पति का रवैया थोड़ा अलग था जो पात्र को और भी दिलचस्प बना रहा था। मुझे उनकी शारीरिक भाषा बहुत पसंद आई जो बिना बोले सब कुछ कह रही थी। ऐसे कार्यक्रम बार बार देखने को मिलते नहीं हैं।
पृष्ठभूमि संगीत ने दृश्य को और भी नाटकीय बना दिया था। जब वो पास आए तो संगीत की धुन बदल गई जो तनाव को बढ़ा रही थी। परफेक्ट हसबैंड का जाल में ध्वनि योजना पर भी खासा ध्यान दिया गया है। रोशनी का इस्तेमाल भी बहुत अच्छा था जिससे चेहरे के भाव साफ दिख रहे थे। रात के दृश्य में नीली रोशनी ने जो माहौल बनाया वो काबिले तारीफ है। तकनीकी पक्ष भी बहुत मज़बूत है।
इस कार्यक्रम में पति और पत्नी के रिश्ते को नए नज़रिए से दिखाया गया है। कभी लगता है कि वो दुश्मन हैं तो कभी लगता है कि वो एक दूसरे के बिना रह नहीं सकते। परफेक्ट हसबैंड का जाल में ये कशमकश बहुत अच्छे से दिखाई गई है। जब उसने उसका हाथ पकड़ा तो लगा कि शायद वो माफ़ कर देगी। ये जो भावनात्मक उतार चढ़ाव है वो असली जिंदगी जैसा लगता है। बहुत ही अपनापन लगने वाली कहानी है।
हर दृश्य के बाद यही सवाल उठता है कि आखिरकार होगा क्या। जब वो कमरे से बाहर गया तो चेहरे पर गुस्सा साफ था। परफेक्ट हसबैंड का जाल का चरमोत्कर्ष क्या होगा ये जानने के लिए सब बेताब हैं। क्या वो उसे छोड़ देगा या फिर सब ठीक हो जाएगा। ये अनिश्चितता ही इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी ताकत है जो दर्शकों को बांधे रखती है। मुझे लगता है कि अंत बहुत ही धमाकेदार होने वाला है।
अगर आप अच्छा नाटक देखना चाहते हैं तो ये कार्यक्रम आपके लिए श्रेष्ठ है। नेटशॉर्ट ऐप पर इसकी गुणवत्ता बहुत अच्छी है और कहानी भी दिलचस्प है। परफेक्ट हसबैंड का जाल को मैंने बिना रुके देखा क्योंकि हर पल कुछ नया हो रहा था। ऐसी सामग्री की कमी आजकल हो गई है जो परिवार के साथ भी देखा जा सके। मुझे उम्मीद है कि ऐसे ही और भी कार्यक्रम आते रहेंगे जो मनोरंजन करेंगे।
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