शुरुआत में ही तनाव साफ झलकता है जब वह उसके करीब जाती है। आंखों में शक और दिल में डर दोनों साफ दिख रहे थे। परफेक्ट हसबैंड का जाल में ऐसा लगता है कि हर छूने का मतलब कुछ और ही है। बिस्तर पर मिली वो छोटी चीज ने सब बदल दिया। सस्पेंस बढ़ता जा रहा है और दर्शक बस देखते रह जाते हैं। क्या वह भरोसा कर सकती है किसी पर भी इस कहानी में।
कमरे का माहौल बहुत ही गहरा और रहस्यमयी बनाया गया है। जब उसने उस छोटे डिवाइस को हाथ में लिया तो चेहरे के भाव देखने लायक थे। परफेक्ट हसबैंड का जाल की कहानी में हर मोड़ पर नया झटका लगता है। बाहर खड़ा वह व्यक्ति कौन था और क्यों देख रहा था ऊपर की तरफ। यह सवाल दिमाग में घूम रहा है।
एक्टिंग बहुत ही नेचुरल लगती है खासकर जब वह अपार्टमेंट में घुसती है। बिखरी हुई बोतलें और बेहोश पड़ा व्यक्ति देखकर जो घबराहट हुई वह असली लगती थी। परफेक्ट हसबैंड का जाल में डर का ऐसा माहौल बनाया गया है कि सांसें रुक जाएं। हर सीन के बाद लगता है कि अब क्या होने वाला है।
सस्पेंस थ्रिलर पसंद करने वालों के लिए यह बेहतरीन है। रंगों का इस्तेमाल और लाइटिंग बहुत ही मूडी है। जब वह सीढ़ियां चढ़ रही थी तो पीछे का संगीत और भी डरावना लग रहा था। परफेक्ट हसबैंड का जाल में विजुअल स्टोरीटेलिंग बहुत मजबूत है। बिना डायलॉग के ही बहुत कुछ समझ आ जाता है दर्शकों को।
कपड़ों का चयन भी किरदार की स्थिति को बता रहा है। पहले सूट में वह कॉन्फिडेंट लग रही थी फिर ट्रेन कोट में वह किसी जासूस जैसी लग रही थी। परफेक्ट हसबैंड का जाल में स्टाइल और स्टोरी का अच्छा मेल है। जब उसने उस अनजान व्यक्ति को देखा तो आंखों में सवाल थे। कहानी आगे क्या मोड़ लेगी यह जानना जरूरी है।
बेडरूम वाला सीन बहुत ही इंटेंस था। वह उसके करीब गई लेकिन उसकी आंखों में प्यार नहीं शक था। परफेक्ट हसबैंड का जाल में रिश्तों की यह खिंचावट बहुत अच्छे से दिखाई गई है। फिर अचानक वह चीज मिलना और चेहरे का रंग उतर जाना। यह सब बहुत तेजी से हुआ लेकिन असर गहरा छोड़ गया।
बाहर का सीन थोड़ा शांत था लेकिन उसमें भी एक अजीब सी बेचैनी थी। वह व्यक्ति हरे कोट में बहुत ही रहस्यमयी लग रहा था। परफेक्ट हसबैंड का जाल में हर किरदार के पीछे कोई न कोई राज छिपा है। जब वह बिल्डिंग के अंदर गई तो लग रहा था कि अब कुछ बड़ा होने वाला है। माहौल में सन्नाटा छा गया था।
अंत में जो दृश्य दिखा वह चौंकाने वाला था। जमीन पर पड़ी हरी बोतलें और बेहोश पड़ा शख्स। परफेक्ट हसबैंड का जाल में क्लाइमेक्स की शुरुआत बहुत धमाकेदार हुई है। उस लड़की की चीख सुनने को मिली तो रोंगटे खड़े हो गए। यह कहानी अभी बहुत आगे जाने वाली है और हम बस देखते रह जाएंगे।
निर्देशन बहुत ही बारीक है। कैमरा एंगल जब उसकी उंगली को दिखा रहा था तो फोकस सिर्फ उसी पर था। परफेक्ट हसबैंड का जाल में छोटी छोटी चीजों पर ध्यान दिया गया है। जब वह दरवाजा खोलती है तो हमें भी लगता है कि हम भी उसके साथ हैं। यह अनुभव बहुत ही इमर्सिव है दर्शकों के लिए।
कहानी की रफ्तार बहुत संतुलित है। न तो बहुत तेज और न ही बहुत धीमी। परफेक्ट हसबैंड का जाल में हर सीन का अपना वजन है। जब वह उस छोटी सी चीज को देख रही थी तो समय जैसे रुक गया था। अब सबकी नजरें अगले एपिसोड पर टिकी हुई हैं कि आखिर सच क्या है।
इस एपिसोड की समीक्षा
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