अंत में पत्नी के चेहरे पर जो डर था वो देखकर रोंगटे खड़े हो गए। पति इतना खूबसूरत खेल खेल रहा था कि कोई शक ही नहीं किया। परफेक्ट हसबैंड का जाल में यह मोड़ बिल्कुल अप्रत्याशित था। फोन का मैसेज आते ही सब कुछ बदल गया। बच्ची के गुम होने की खबर ने कहानी को नया मोड़ दे दिया। अब देखना है कि आगे क्या होता है। सस्पेंस बना हुआ है।
कार वाली सीन में जो तनाव था वो लाजवाब था। सीटबेल्ट लगाने वाला पल रोमांटिक लगा पर पीछे छिपे खतरे का अहसास हुआ। परफेक्ट हसबैंड का जाल की कहानी काफी जटिल होती जा रही है। बारिश की बूंदें और खामोशी डर को बढ़ा रही थी। अभिनेता की आंखों में छिपा राज जानना जरूरी है। हर डायलॉग के पीछे कोई मतलब छिपा हुआ लग रहा है।
फूल लेकर खड़ा वह व्यक्ति कौन था यह स्पष्ट नहीं हुआ। पत्नी के चेहरे पर कन्फ्यूजन साफ दिखाई दिया। परफेक्ट हसबैंड का जाल में हर किरदार संदिग्ध लग रहा है। क्या वह पुराना प्रेमी था या कोई और रिश्तेदार। इस उलझन ने कहानी में दिलचस्पी बढ़ा दी है। अस्पताल से निकलते ही सब कुछ बदल गया। अब सच्चाई सामने आएगी।
ऑफिस के सीन में पानी पिलाना सामान्य लगा पर अब लगता है कि कुछ और ही था। परफेक्ट हसबैंड का जाल का प्लॉट धीरे धीरे खुल रहा है। लैपटॉप खोलते ही पत्नी के होश उड़ गए। क्या उसमें कोई सबूत था। कमरे का माहौल काफी गंभीर था। किताबों वाले शेल्फ ने बैकग्राउंड को अच्छा बनाया। हर छोटी चीज पर ध्यान देना जरूरी है।
बच्ची की मां का मैसेज दिल को छू गया। मां का दर्द साफ समझ आ रहा था। परफेक्ट हसबैंड का जाल में यह इमोशनल लेयर अच्छा लगा। बच्ची के गुम होने की जिम्मेदारी किस पर है। फोन की नोटिफिकेशन ने सनसनी फैला दी। अब सवाल यह है कि डॉक्टर को क्या पता है। कहानी में गहराई आ गई है।
वह फ्लैशबैक सीन काफी डरावना था। क्या सच में वहां मारपीट हुई थी। परफेक्ट हसबैंड का जाल में हिंसा का उपयोग कहानी के लिए है। बोतलें बिखरी हुई थीं और शोरगुल था। पत्नी की चीखें कानों में गूंज रही थीं। यह दृश्य दर्शकों को झकझोर देता है। सच्चाई जानने की उत्सुकता बढ़ गई है। कौन था वह हमलावर।
अभिनेत्री की एक्टिंग जबरदस्त है। डर और कन्फ्यूजन आंखों में साफ था। परफेक्ट हसबैंड का जाल में परफॉर्मेंस टॉप नॉच है। बिना बोले ही सब कुछ कह दिया। चेहरे के भाव बदलते रहे। ऑफिस में बैठकर भी घबराहट साफ दिखी। दर्शक भी उनके साथ डर रहे हैं। यह कलाकारी देखने लायक है। हर एक्सप्रेशन मायने रखता है।
पति का व्यवहार बदलता रहा। कभी केयरिंग तो कभी डरावना। परफेक्ट हसबैंड का जाल में यह ड्युअलिटी हाईलाइट है। चश्मे वाले शख्स का रवैया रहस्यमयी था। क्या वह दोहरा खेल खेल रहा है। रिश्तों में दरारें साफ दिख रही हैं। भरोसा टूटता हुआ लग रहा है। अब आगे क्या होगा यह देखना बाकी है।
बैनर में लिखा था सुकून पर अंत में डर था। आयरनी अच्छी थी। परफेक्ट हसबैंड का जाल में डिटेल्स पर ध्यान दिया गया है। लाल रंग का बैनर खतरे की घंटी बजा रहा था। दीवार पर टंगी चीजें भी कुछ इशारा कर रही थीं। सेट डिजाइन बहुत प्रभावशाली लगा। माहौल बनाने में मेहनत साफ दिखी। हर कोने में राज छिपा है।
कहानी तेज चलती है। हर सीन में नया क्लू मिलता है। परफेक्ट हसबैंड का जाल देखने का अनुभव एंगेजिंग रहा। रात का समय और बारिश ने डर बढ़ाया। अस्पताल से लेकर ऑफिस तक का सफर रोमांचक था। अंत में जो झटका लगा वो लंबे समय तक याद रहेगा। सीरीज को आगे देखने का मन कर रहा है।
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