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आपदाएँ बरसीं, सिस्टम से पाई राहवां40एपिसोड

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आपदाएँ बरसीं, सिस्टम से पाई राह

अंजलि एक प्राचीन आपदा प्रणाली में जाकर एक पाँच साल की बालिका के शरीर में समा जाती है। उसका कार्य है—टिड्डी दल, शीत लहर, महामारी, अकाल जैसी भीषण आपदाओं से अपने परिवार को बचाना। अंत तक जीवित रहने पर वह असली दुनिया में लौट सकती है और सौ अरब जीत सकती है। रास्ते में उसे लोगों के अविश्वास, विरोध और आपदाओं से पैदा मानवीय संकटों का भी सामना करना पड़ता है। अंततः अपनी बुद्धि और सिस्टम के इनामों से वह पूरे गाँव को बचाकर नेता बन जाती है। जब लौटने का समय आता है, तो सिस्टम में
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इस एपिसोड की समीक्षा

बच्ची की आँखों में छिपा है राज

जब वो विशालकाय राक्षस धुंध में से निकला, तो लगा जैसे आपदाएँ बरसीं, सिस्टम से पाई राह मिल गई हो! लेकिन असली डर तो उस छोटी बच्ची की मासूम आँखों में था — जो सब कुछ देख रही थी, पर चुप थी। लाल पोशाक वाली महिला का रोना, बुजुर्ग महिला का गंभीर चेहरा, और वो आदमी जो बार-बार हाथ जोड़ रहा था — सब कुछ एक रहस्यमयी तनाव बनाए रखता है। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे ड्रामे देखना सच में दिलचस्प होता है, जहाँ हर फ्रेम में कुछ न कुछ छिपा होता है।

बच्ची की आँखों में छिपा है राज़

जब वो विशालकाय राक्षस धुंध में से निकला, तो लगा जैसे आपदाएँ बरसीं, सिस्टम से पाई राह का कोई जादू चल रहा हो! दरवाज़े पर टकराता आदमी, भीड़ की घबराहट, और वो छोटी बच्ची जो सब कुछ शांति से देख रही है — उसकी आँखों में डर नहीं, बल्कि एक अजीब सी समझ है। लाल पोशाक वाली महिला का रोना, बुजुर्ग महिला का गंभीर चेहरा, और वो युवक जो चुपचाप सब देख रहा है — हर चेहरे पर एक कहानी है। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे दृश्य देखकर लगता है जैसे खुद उस गुफा में खड़े हों, जहाँ हर सांस में रहस्य है।