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आपदाएँ बरसीं, सिस्टम से पाई राहवां7एपिसोड

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आपदाएँ बरसीं, सिस्टम से पाई राह

अंजलि एक प्राचीन आपदा प्रणाली में जाकर एक पाँच साल की बालिका के शरीर में समा जाती है। उसका कार्य है—टिड्डी दल, शीत लहर, महामारी, अकाल जैसी भीषण आपदाओं से अपने परिवार को बचाना। अंत तक जीवित रहने पर वह असली दुनिया में लौट सकती है और सौ अरब जीत सकती है। रास्ते में उसे लोगों के अविश्वास, विरोध और आपदाओं से पैदा मानवीय संकटों का भी सामना करना पड़ता है। अंततः अपनी बुद्धि और सिस्टम के इनामों से वह पूरे गाँव को बचाकर नेता बन जाती है। जब लौटने का समय आता है, तो सिस्टम में
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इस एपिसोड की समीक्षा

बूढ़ी दादी का गुस्सा देखकर डर लग रहा है

इस दृश्य में तनाव इतना ज्यादा है कि सांस रुक जाती है। जब बूढ़ी दादी ने अपना हाथ आगे बढ़ाया, तो लगा जैसे कोई बड़ा फैसला होने वाला हो। उस छोटी बच्ची की आंखों में डर और उम्मीद दोनों साफ दिख रहे थे। आपदाएँ बरसीं, सिस्टम से पाई राह जैसे ही यह लाइन आई, मन में एक अजीब सी राहत महसूस हुई। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे ही इमोशनल मोमेंट्स देखना बहुत अच्छा लगता है। हर चेहरे पर एक कहानी लिखी हुई है, खासकर उस युवक की चुप्पी जो सब कुछ कह रही थी।

बूढ़ी दादी का गुस्सा देखकर डर लग रहा है

इस दृश्य में तनाव इतना ज्यादा है कि सांस रुक जाए। बूढ़ी दादी का चेहरा देखकर लगता है जैसे वो किसी बड़े फैसले के कगार पर हैं। छोटी बच्ची की आंखों में डर और उम्मीद दोनों झलक रहे हैं। युवक का शांत रहना भी संदेह पैदा करता है। आपदाएँ बरसीं, सिस्टम से पाई राह जैसे ही लगता है जब दादी अपना हाथ आगे बढ़ाती हैं। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे ड्रामे देखना बहुत मजेदार है, हर पल नया ट्विस्ट आता है।