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आपदाएँ बरसीं, सिस्टम से पाई राहवां57एपिसोड

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आपदाएँ बरसीं, सिस्टम से पाई राह

अंजलि एक प्राचीन आपदा प्रणाली में जाकर एक पाँच साल की बालिका के शरीर में समा जाती है। उसका कार्य है—टिड्डी दल, शीत लहर, महामारी, अकाल जैसी भीषण आपदाओं से अपने परिवार को बचाना। अंत तक जीवित रहने पर वह असली दुनिया में लौट सकती है और सौ अरब जीत सकती है। रास्ते में उसे लोगों के अविश्वास, विरोध और आपदाओं से पैदा मानवीय संकटों का भी सामना करना पड़ता है। अंततः अपनी बुद्धि और सिस्टम के इनामों से वह पूरे गाँव को बचाकर नेता बन जाती है। जब लौटने का समय आता है, तो सिस्टम में
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इस एपिसोड की समीक्षा

आग और आंसुओं का मिलन

जब आसमान से आग बरसी, तो इंसानियत की चिंगारी भी बुझ गई। इस दृश्य में हर चेहरे पर डर, हर आँख में बेबसी साफ़ दिख रही है। बच्ची की मासूमियत और बूढ़ी महिला का दर्द दिल को चीर देता है। आपदाएँ बरसीं, सिस्टम से पाई राह — ये लाइन इस स्थिति पर बिल्कुल फिट बैठती है। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे इमोशनल सीन्स देखकर लगता है कि कहानी सिर्फ़ स्क्रीन पर नहीं, दिल में भी उतर गई है।

अंतिम विदाई का दर्द

इस दृश्य में भावनाओं का जो तूफान है, वह रोंगटे खड़े कर देता है। बूढ़ी माँ का बेटे के चेहरे को सहलाना और रोना दिल को चीर देता है। आपदाएँ बरसीं, सिस्टम से पाई राह में दिखाया गया यह परिवारिक बंधन और विछोह का दर्द बेहद असली लगता है। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे इमोशनल सीन्स देखना एक अलग ही अनुभव है।