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आपदाएँ बरसीं, सिस्टम से पाई राहवां48एपिसोड

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आपदाएँ बरसीं, सिस्टम से पाई राह

अंजलि एक प्राचीन आपदा प्रणाली में जाकर एक पाँच साल की बालिका के शरीर में समा जाती है। उसका कार्य है—टिड्डी दल, शीत लहर, महामारी, अकाल जैसी भीषण आपदाओं से अपने परिवार को बचाना। अंत तक जीवित रहने पर वह असली दुनिया में लौट सकती है और सौ अरब जीत सकती है। रास्ते में उसे लोगों के अविश्वास, विरोध और आपदाओं से पैदा मानवीय संकटों का भी सामना करना पड़ता है। अंततः अपनी बुद्धि और सिस्टम के इनामों से वह पूरे गाँव को बचाकर नेता बन जाती है। जब लौटने का समय आता है, तो सिस्टम में
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इस एपिसोड की समीक्षा

बच्ची की आँखों में छिपा है राज

जब आपदाएँ बरसीं, सिस्टम से पाई राह, तो इस बच्ची ने सबको चौंका दिया! धुंधले जंगल में रस्सी से बंधी मासूम लड़की, उसके चेहरे पर डर नहीं, बल्कि एक अजीब सी चमक है। बुजुर्ग महिला की आँखों में आँसू, पुरुषों के चेहरे पर तनाव — सब कुछ इतना तीव्र है कि सांस रुक जाए। रस्सी खींचने का दृश्य तो जैसे दिल की धड़कन बढ़ा दे! नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे ड्रामे देखकर लगता है कि कहानी खुद बोल रही है। बच्ची की आवाज़, उसकी हरकतें — सब कुछ इतना सच्चा लगता है कि आप भी उस रस्सी को पकड़ लेना चाहेंगे।

बच्ची की आँखों में छिपा है राज

जब आपदाएँ बरसीं, सिस्टम से पाई राह, तो इस नाटक ने दिल छू लिया। छोटी बच्ची की मासूमियत और उसकी आँखों में छिपी गहराई देखकर लगता है जैसे वह किसी बड़े रहस्य की चाबी हो। धुंधले जंगल का माहौल, रस्सियों से बंधे लोग और अचानक उठने वाला तूफान—सब कुछ इतना तनावपूर्ण है कि सांस रुक जाए। बुजुर्ग महिला का गुस्सा और बच्ची का डर एक-दूसरे को काटते हैं, जैसे कोई पुरानी कहानी फिर से जी उठी हो। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे दृश्य देखकर लगता है कि आप खुद उस जंगल में खड़े हैं।