ईशानी देवी का सम्मान समारोह इतनी जल्दी खून से लथपथ हो जाएगा, किसी ने सोचा भी नहीं था। मोहिनी की आँखों में जो नफरत थी, वो सिर्फ ईर्ष्या नहीं, बल्कि पिछले जन्म का बदला लग रहा था। जब ईशानी ने कहा कि यह सब भ्रम है, तो रूह कांप गई। (डबिंग) पुनर्जन्म: भाग्य की महारानी में ऐसा मोड़ देखकर स्तब्ध रह गए।
स्वयंवर के दिन मोहिनी ने जानबूझकर विक्रम सिंह को पुष्पमाला पहनाई, जबकि ईशानी चुपचाप खड़ी रही। लगता है पिछले जन्म में कुछ ऐसा हुआ था जिसने मोहिनी को इस जन्म में इतना क्रूर बना दिया। माँ जोशी की खुशी और पिता राजनाथ देव का गर्व देखकर लगता है सब धोखा है।
राजदेश अटल रहेगा कहते हुए ईशानी के हाथ से खून टपका और मोहिनी पागलों की तरह हंसी। यह दृश्य इतना तीव्र था कि सांस रुक गई। दोनों बहनें एक ही माँ की बेटी हैं, फिर भी नफरत इतनी गहरी? (डबिंग) पुनर्जन्म: भाग्य की महारानी में हर पल नया झटका देता है।
मोहिनी ने विक्रम सिंह राजमहल को चुनकर सिर्फ अपना भाग्य नहीं, बल्कि पूरे देव महल का भविष्य बदल दिया। लेकिन ईशानी की आँखों में जो चेतावनी थी, वो किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा कर रही थी। क्या राजमहल वाकई साजिशों का जाल है?
मोहिनी बार-बार कह रही है कि पिछले जन्म में ईशानी ने सब कुछ छीन लिया था। अब इस जन्म में वो सब वापस ले रही है। लेकिन क्या बदला लेने से सुकून मिलता है? दोनों बहनें जमीन पर पड़ी थीं, एक मरी हुई, एक पागल हंसी हंस रही थी। दिल दहल गया।