माँ का दिल, बेटी की जिद देखकर रूह कांप गई। काव्या गुप्ता की आँखों में वो दर्द था जो शब्दों में बयां नहीं हो सकता। बर्फ़ में भीगकर घर लौटना और बेटी के लिए खाना लाना, ये माँ का प्यार ही है जो हर मुश्किल को हरा देता है। मोली की मासूमियत और उसकी भूख ने दिल छू लिया।
काव्या गुप्ता के टूटे हुए हाथ और उन पर बंधी पट्टियां देखकर समझ आया कि उसने क्या सहन किया है। माँ का दिल, बेटी की जिद में ये दृश्य सबसे ज्यादा प्रभावशाली था। उसने अपनी तकलीफ को छुपाकर बेटी को खुश करने की कोशिश की, जो हर माँ की फितरत होती है। नेटशॉर्ट पर ऐसे इमोशनल कंटेंट देखना सुकून देता है।
बिजली चली गई थी लेकिन काव्या गुप्ता ने मोमबत्ती की रोशनी में अपने घर को रोशन रखा। माँ का दिल, बेटी की जिद का ये सीन बहुत ही खूबसूरत था। अंधेरे कमरे में सिर्फ एक मोमबत्ती और माँ-बेटी का प्यार, ये दृश्य यादगार बन गया। मोली के चेहरे पर वो खुशी देखकर लगता है कि सब ठीक हो जाएगा।
फ्लैशबैक में दिखाया गया कि कैसे काव्या गुप्ता और मोली की जिंदगी बदल गई। माँ का दिल, बेटी की जिद में ये ट्विस्ट बहुत जरूरी था। गाड़ी का आना और फिर वो हादसा, सब कुछ बहुत तेजी से हुआ। आज का संघर्ष उसी दिन की देन है। काव्या की हिम्मत को सलाम है जो अकेले बेटी को पाल रही है।
जब काव्या गुप्ता ने मोली को वो बड़ा सा बून दिया, तो मोली की आँखों में चमक आ गई। माँ का दिल, बेटी की जिद में ये छोटा सा पल बहुत बड़ा संदेश देता है। भूखे पेट सूखी रोटी भी स्वादिष्ट लगती है जब वो माँ के प्यार से मिले। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे दिल को छू लेने वाले सीन देखने को मिलते हैं।