हरा चोगा पहने व्यक्ति की आँखों में पागलपन साफ दिख रहा था। जब उसने आग का गोला फेंका, तो लगा जैसे ठुकराई माँ, छुपा आसमान की दुनिया में आग लग गई हो। लड़की के मुंह से खून बह रहा था, फिर भी वह डटी रही। यह दृश्य दिल दहला देने वाला था।
खलनायक का गुस्सा देखकर रोंगटे खड़े हो गए। उसकी हर हरकत में नफरत झलक रही थी। जब वह चिल्लाया, तो लगा जैसे ठुकराई माँ, छुपा आसमान की कहानी का सबसे अंधेरा पल आ गया हो। नायक की चुप्पी और खलनायक का शोर, दोनों का विरोधाभास कमाल का था।
लड़की के चेहरे पर खून की लकीर देखकर दिल बैठ गया। वह डरी नहीं, बल्कि चुनौती दे रही थी। ठुकराई माँ, छुपा आसमान में ऐसे किरदार ही कहानी को आगे बढ़ाते हैं। उसकी आँखों में डर नहीं, बदले की आग थी जो खलनायक को भी डरा रही थी।
एक तरफ जादू की चमक, दूसरी तरफ शारीरिक ताकत। जब खलनायक ने अपनी शक्तियां दिखाईं, तो लगा जैसे ठुकराई माँ, छुपा आसमान की दुनिया हिल गई हो। नायक की तैयारी और खलनायक का घमंड, दोनों के बीच की टक्कर देखने लायक थी।
खलनायक के दर्द भरे चीखने से पूरा माहौल गंभीर हो गया। जब वह जमीन पर गिरा, तो लगा जैसे ठुकराई माँ, छुपा आसमान की कहानी का मोड़ आ गया हो। उसका खून से भरा मुंह और टूटी हुई सांसें, सब कुछ बहुत वास्तविक लग रहा था।